विभाग द्वारा कन्या छात्रावास में रहने के लिए 44 छात्राओं को अनुमति दे दी गई थी , लेकिन स्कूल खुलने के बाद आज ढ़ाई माह बीत चुके फिर भी इन छात्राओं को अपने घर से स्कूल आना जाना पड़ रहा है आपको बता दें कि कई छात्राओं के घर फरसाबहार विकासखंड मुख्यालय से 5
किलोमीटर से लेकर 20 किलोमीटर की दूरी तक स्थित है , और इस क्षेत्र में बस सेवा भी हर समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती , ऐसे में छात्राओं और उनके परिजनों का कहना है कि शाम 4.30 बजे छुट्टी होने के बाद घर तक की दूरी तय करने के लिए चाहे तो उन्हें बस का सहारा लेना पड़ता है और यदि बस छूट जाती है तो फिर परिजनों को स्वयं स्कूल लेने आना पड़ता है , आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से कई परिजन बच्चों को लेने साइकिल से लेकर मोटरसाइकिल तक का भी सहारा लेते हैं । यह भी बताना जरूरी है कि यह क्षेत्र हाथी प्रभावित क्षेत्र है जिसे गजलोक के नाम से भी जाना जाता है ऐसे में छुट्टी मिलने के बाद छात्राए डर के साय में देर शाम अपने घर पहुंचती हैं । छात्राओं समेत परिजनों ने मांग की है कि जल्द से जल्द उन्हें छात्रावास में रहने की जगह दी जाए ताकि स्कूल समय पर पहुंचकर अपनी शिक्षा अच्छे से ग्रहण कर पाए ।
मामले में स्वामी आत्मानंद स्कूल के प्राचार्य हेमंत कुमार निकुंज ने बताया कि हिंदी मीडियम से 30 छात्राएं और इंग्लिश मीडियम से 14 छात्राओं को हॉस्टल में रहने के लिए अनुमति दी गई थी, छात्राएं लगभग 20-30 किलोमीटर के दायरे से आती हैं और जब शाम को जब छुट्टी होती है तो उन्हें पहुंचने तक अंधेरा हो जाता है, प्राचार्य निकुंज ने बताया छात्रावास अधीक्षका के द्वारा एडमिशन की जानकारी दी गई थी लेकिन अभी तक छात्राओं को हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है बच्चों को दूरी के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि एकलव्य स्कूल में पढ़ रहे छात्र इस भवन में रह रहे हैं जबकि उन्हें मंगल भवन में शिफ्ट करने की बात कही गई थी। बड़ी बात यह है कि कन्या छात्रावास होने के बावजूद इसमें छात्र क्यों रह रहे हैं, जबकि कन्या छात्रावास में सिर्फ बालिकाएं ही रह
सकती है । इतना ही नहीं जानकारी के मुताबिक 50 सीटर कन्या छात्रावास में 90 छात्रा से ऊपर निवासरत है । मामले में जब हमने
विकासखंड के मंडल संयोजक लालदेव भगत से टेलीफोनिक जानकारी लेने की कोशिश की तो उनके द्वारा किसी प्रकार का भी जवाब नहीं दिया गया । अब छात्राओं को आस है कि जल्द से जल्द उन्हें हॉस्टल में रहने की सुविधा दी जाए ताकि वह समय के साथ-साथ आर्थिक बोझ से बच सके और उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रहे ।


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