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शव वाहन नहीं मिला तो कचरा वाहन बना सहारा, एसआई सस्पेंड, चर्चा गरम

शव वाहन नहीं मिला तो कचरा वाहन बना सहारा, एसआई सस्पेंड, चर्चा गरम

रिपोर्ट:- नानक राजपुत 

बाकिमोंगरा क्षेत्र में एक महिला के शव को कचरा ढोने वाले वाहन में पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में संबंधित ए एस आई पृथ्वीराज को कोरबा एसपी ने निलंबित कर दिया है। प्रशासन की इस कार्यवाही ने लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है।

जानकारी के मुताबिक, जैसे ही बाकिमोंगरा पुलिस को महिला के अधजली लाश की सूचना मिली, तत्काल मौके पर पहुंच कर पंचनामा और अन्य वैधानिक प्रक्रिया शुरू की। महिला की पहचान और मौत के कारणों की जानकारी जुटाने में पुलिस लगी रही। जब सब कुछ स्पष्ट हुआ तो शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन शव वाहन समय पर उपलब्ध नहीं हो सका। इसी दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई जिससे पुलिस पर दबाव और तनाव बढ़ गया। सूत्रों की मानें तो अगर यह मामला आपराधिक होता, तो घटनास्थल से सबूत जुटाने में भीड़ के कारण बाधा भी आती। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एएसआई और उनकी टीम ने नगर निगम के कचरा फेंकने वाले वाहन की सफाई कर, शव को उसमें रखकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालांकि यह फैसला परिस्थितियों के दबाव में लिया गया था, लेकिन शव को कचरा वाहन में ले जाना समाज की दृष्टि से असंवेदनशील माना गया। स्थानीय लोगो का कहना है अगर शव वाहन मिल जाता तो ऐसा दृश्य सामने नहीं आता। लेकिन हम ये भी देख रहे थे कि पुलिस ने गंभीरता से जांच की और जल्दी से जल्दी महिला की पहचान की।"

हालांकि यह भी सच है कि शव वाहन की अनुपलब्धता में पुलिस के पास तत्काल कोई और विकल्प नहीं था। कार्यवाही हो SECL के अधिकारी पर भी क्युकी मृतिका के पति ने SECL मे अपनी सेवाएं दी थी उसके बावजूद secl द्वारा शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया ना ही किसी प्रकार की सहयोग किया गया। हालांकि एसपी द्वारा एसआई को निलंबित किए जाने से सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि ऐसी मजबूरी में लिया गया फैसला गलत नहीं कहा जा सकता। इस कार्यवाही के बाद जिले के अन्य थाना प्रभारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि अब वे किसी भी परिस्थिति में शव को भी सम्मान के साथ अंतिम प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे। यह घटना एक बड़ी सीख है कि भले ही परिस्थिति कितनी भी जटिल क्यों न हो, शव के सम्मान से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील होता है। पुलिस को आगे से ऐसी परिस्थिति के लिए पहले से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखनी चाहिए।

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