सुशासन तिहार में उलझा रविदास मोहल्ला का हैंडपंप, निराकरण में विरोधाभास से उठे सवाल
*"पानी नहीं है" कहकर आवेदन खारिज, फिर उसी बोर की जांच और हैंडपंप लगाने की बात क्यों?*
बिलाईगढ़। प्रदेश सरकार जहां सुशासन तिहार के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने का दावा कर रही है, वहीं नगर पंचायत बिलाईगढ़ के वार्ड क्रमांक 10 स्थित रविदास मोहल्ला का मामला इन दावों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है। एक ही बोर के संबंध में नगर पंचायत द्वारा अलग-अलग समय पर जारी किए गए विरोधाभासी पत्रों ने नगर पंचायत प्रशासन और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुशील चौधरी की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार रविदास मोहल्ला में फरवरी 2024 में बोर की खुदाई की गई थी। मोहल्लेवासियों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 8 अप्रैल 2025 को सुशासन तिहार 2025 के अंतर्गत हैंडपंप/बोर मशीन लगाने आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके जवाब में सीएमओ सुशील चौधरी ने पत्र क्रमांक 147 दिनांक 09 मई 2025 जारी कर यह कहते हुए आवेदन निराकृत कर दिया कि संबंधित बोर में पानी नहीं है तथा वार्डवासियों के लिए पेयजल की अन्य व्यवस्थाएं कर दी गई हैं।
लेकिन मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। एक वर्ष तक लगातार आवेदन और मांग के बावजूद जब हैंडपंप स्थापित नहीं किया गया तो पुनः सुशासन तिहार 2026 में उसी स्थल पर हैंडपंप लगाने का आवेदन प्रस्तुत किया गया। आश्चर्यजनक रूप से इस बार सीएमओ द्वारा जारी पत्र क्रमांक 269 दिनांक 02 जून 2026 में यह लिखा गया कि खनित बोर की गहराई एवं केसिंग की जांच के निर्देश दिए गए हैं तथा भंडार गृह में हैंडपंप सामग्री उपलब्ध होने अथवा राशि प्राप्त होने पर स्थापना की जाएगी।
*एक ही बोर पर दो अलग-अलग दावे*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वर्ष 2025 में नगर पंचायत स्वयं यह लिख चुकी थी कि संबंधित बोर में पानी नहीं है, तो फिर वर्ष 2026 में उसी बोर की गहराई और केसिंग जांचकर हैंडपंप स्थापना की संभावना क्यों तलाश रही है? क्या पहले जारी किया गया निराकरण तथ्यहीन था या अब दिया गया जवाब वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता?
आवेदन का विषय स्पष्ट रूप से हैंडपंप स्थापना से जुड़ा है, लेकिन कार्यालयीन निराकरण में जांच, सामग्री उपलब्धता और राशि मिलने की बात लिखी गई है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं आवेदनों का केवल औपचारिक निराकरण कर सुशासन तिहार की खानापूर्ति तो नहीं की जा रही।
*14.71 लाख की सामग्री खरीदी, फिर सामग्री नहीं होने का बहाना?*
मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब नगर पंचायत के भुगतान अभिलेखों में दिनांक 02 मार्च 2026 को मेसर्स रमेश हार्डवेयर के नाम लगभग 14 लाख 71 हजार 122 रुपये की लागत से बोर एवं हैंडपंप सामग्री क्रय किए जाने का उल्लेख सामने आया है। यदि नगर पंचायत ने लाखों रुपये की सामग्री खरीदी है तो फिर पत्र में "सामग्री उपलब्ध होने अथवा राशि प्राप्त होने पर स्थापना" जैसी टिप्पणी क्यों की गई?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक ओर सामग्री खरीदी जा रही है, दूसरी ओर जरूरतमंद मोहल्लों में वर्षों तक हैंडपंप नहीं लगाए जा रहे हैं। इससे वित्तीय प्रबंधन और कार्यों की प्राथमिकता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
*रविदास मोहल्ला की उपेक्षा या बदले की भावना?*
रविदास मोहल्ला के निवासियों का कहना है कि वे पिछले एक वर्ष से अधिक समय से पेयजल सुविधा की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। लोगों में यह चर्चा भी है कि कहीं प्रशासनिक स्तर पर मोहल्ले के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया या बदले की भावना तो नहीं अपनाई जा रही, क्योंकि लगातार आवेदन के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
*सुशासन तिहार की भावना पर सवाल*
प्रदेश सरकार का उद्देश्य सुशासन तिहार के माध्यम से जनता की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान करना है। लेकिन रविदास मोहल्ला का यह प्रकरण बताता है कि कागजों में निराकरण दिखाकर वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। एक ही मामले में दो अलग-अलग जवाब, सामग्री खरीदी के बावजूद स्थापना नहीं होना और वर्षों तक लंबित समस्या प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है।
अब मोहल्लावासी मांग कर रहे हैं कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, बोर की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए, हैंडपंप सामग्री खरीदी और उपयोग का लेखा-जोखा सामने लाया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
यदि सुशासन तिहार में भी जनता की मूलभूत पेयजल समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा, तो फिर आम नागरिकों को सुशासन का वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा?

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