पत्थलगांव / आपको बता दें कि ग्राम कछार मे ख न = 299 के टुकड़े क्र =03 तथा =04 का बिना 170 ख चलाय तथा बिना किसी अधिकारी के आदेश के रजिस्ट्री कराया गया है जबकि ख न = 299 मिसेल तथा मे आदिवासी बुधु उरांव के नाम पर दर्ज है.. ख न 299/3 छेत्रफल = 0.486 हे को पिछले साल कृष्ण कुमार ने चौहद्दी देकर जशपुर से रजिस्ट्री करवाया तथा उसका नाम संशोधन हेतु जान बूझ के
पंचायत वाले ऑप्शन को पसंद करके पंचायत प्रस्ताव को डाल के किया गया है। हां इसमें ग्राम- कछार के सरपंच और सचिव की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए कि उन्होंने अपने अधिकार छेत्र से बाहर जा कर आदिवासी जमीन के नाम संसोधन हेतु पंचायत प्रस्ताव कैसे दिया ?? तथा वर्तमान मे उसी के अगले टुकड़े =299/4 छेत्रफल=0.462 हे का दिनांक=03/06/2025 को पुनः जशपुर से रजिस्ट्री कराया गया है जिसमे भी उक्त पटवारी द्वारा जान बूझ के चौहद्दी दिया गया है जिसका संशोधन बाकि है । आपको बता दें कि ग्राम - कछार और लुडेग मे पदस्त पटवारी कृष्ण कुमार यादव शुरू से ही मोटी रकम लेके फ़र्ज़ी काम को अंजाम देते रहे हैँ जिस कारण पूर्व मे अपर कलेक्टर महोदय ने इनकी शिकायत के बाद इनको तहसील कार्यालय मे अटैच किया था। परन्तु इनके द्वारा
नेताओं के साथ सेटिंग करके पुनः लुडेग मे पदस्थापना ले लिया गया है ।
अगर सभी आदिवासी जमीन की रजिस्ट्री ऐसे ही आसानी से हो जाति है तो फिर सारी जमीन को बिक जाना चाहिए. वैसे भी अभी डायरेक्ट नामांतरण का ऑप्शन आ गया है अब हर आदिवासी तथा सरकारी जमीन की डायरेक्ट रजिस्ट्री हो जाएगी अगर इन जैसे पटवारी के ऊपर कार्यवाही नहीं हुई तो। डायरेक्ट नामांतरण माननीय मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण योजना है जिसका दुरूपयोग होना शुरू होगा यह कहना गलत नहीं होगा । आपको बता दें जशपुर मे रजिस्ट्री हेतु सिर्फ नक्शा खसरा पटवारी की चौहद्दी और बी -1 की जरुरत पडती है..



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