कोरबा में डीएमएफ घोटाले का बड़ा खुलासा: चार अधिकारी गिरफ्तार, तीन पूर्व सीईओ पोड़ी जनपद से जुड़े, और भी कई रडार पर
कोरबा:- जिले में एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। डीएमएफ (जिला खनिज निधि) घोटाले में ईओडब्ल्यू-एसीबी की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अधिकारियों में भरोसा राम ठाकुर, भूनेश्वर सिंह राज, राधेश्याम मिर्झा और वीरेंद्र कुमार राठौर शामिल हैं। इनमें से तीन अधिकारी – राधेश्याम मिर्झा, भूनेश्वर सिंह राज और वीरेंद्र कुमार राठौर – पूर्व में पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के पद पर कार्यरत रह चुके हैं। इनके नाम हवा हवाई की चर्चा मे तो थे ही लेकिन इस कार्यवाही ने और भी पुख्ता क़र दिया।
क्या है डीएमएफ घोटाला, कैसे हुई कार्रवाई?
डीएमएफ यानी जिला खनिज निधि एक सरकारी योजना है, जिसका उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और आजीविका के क्षेत्र में सुधार करना है। लेकिन कोरबा जिले में इसी निधि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और गबन किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से फर्जी योजनाएं बनाकर या अधूरी योजनाओं को पूरा दिखाकर करोड़ों रुपये का गबन किया गया ईओडब्ल्यू-एसीबी सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से इस घोटाले की जांच चल रही थी। पर्याप्त दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य मिलने के बाद इन चार अधिकारियों को विधिवत गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 13 मई 2025 तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पूछताछ के दौरान इनसे कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
पोड़ी उपरोड़ा जनपद के कार्यकाल पर भी जांच
गिरफ्तार किए गए तीन अधिकारियों ने पूर्व में पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत में सीईओ के रूप में काम किया है। ईओडब्ल्यू की टीम अब इन अधिकारियों के कार्यकाल की सभी योजनाओं और खर्चों की बारीकी से जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, कई ठेकेदार, जो इन अधिकारियों के करीबी रहे हैं जांच के घेरे में हैं। कई परियोजनाओं के फर्जी भुगतान और बिना कार्य किए भुगतान जैसे मामलों की भी परतें खुल रही हैं।
जिले में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद कोरबा जिले के प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है। कई अधिकारी और कर्मचारी खुद को बचाने की जुगत में लगे हैं। वहीं आम जनता और सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है और भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की है।
गौरतलब है कि पूर्व कलेक्टर रानू साहू के कार्यकाल में डीएमएफ फंड के क्रियान्वयन में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। उनके तबादले के बाद इस मामले की जांच को तेज़ी मिली और अब यह कार्रवाई सामने आई है। ईओडब्ल्यू-एसीबी का कहना है कि जब तक इस घोटाले में अंतिम दोषी व्यक्ति तक जांच नहीं पहुंचती, कार्रवाई जारी रहेगी।
कोरबा डीएमएफ घोटाला छत्तीसगढ़ में अब तक का एक बड़ा प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मामला बनता जा रहा है। जांच एजेंसियों की तत्परता और न्यायिक प्रक्रिया से उम्मीद की जा रही है कि इस बार दोषियों को सजा मिलेगी और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता आएगी।

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