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पति की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट से जूझ रही महिला ने कलेक्टर से लगाई रोजगार की गुहार, दैनिक वेतनभोगी के पद पर नियुक्ति की मांग, दो छोटे बच्चों और वृद्ध माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने को मजबूर है सिया कोरचे

पति की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट से जूझ रही महिला ने कलेक्टर से लगाई रोजगार की गुहार, दैनिक वेतनभोगी के पद पर नियुक्ति की मांग, दो छोटे बच्चों और वृद्ध माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने को मजबूर है सिया कोरचे

कोरबा/ सलिहा भाठा :- जिले के पोड़ी उपरोड़ा तहसील अंतर्गत सलिहाभांठा ग्राम पंचायत के खुटरीपारा वार्ड नंबर 07 की रहने वाली सिया कोरचे ने कलेक्टर से भावुक अपील की है। उन्होंने अपने पति की असामयिक मृत्यु के बाद परिवार के भरण-पोषण हेतु स्वयं को कलेक्टर दर पर दैनिक मजदूरी अथवा अन्य किसी भी उपयुक्त पद पर नियुक्त करने की मांग की है।

सिया कोरचे के पति, स्वर्गीय जितेन्द्र सिंह कोरचे, कटघोरा स्थित प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास में बीते तीन वर्षों से दैनिक मजदूर के रूप में कार्यरत थे। वह अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे और उनके वेतन से ही पूरा घर चलता था। दुर्भाग्यवश, दिनांक 14 नवंबर 2024 को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद सिया कोरचे पर दो छोटे बच्चों की परवरिश और वृद्ध माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी आ पड़ी है।.....सिया ने कलेक्टर को दिए अपने आवेदन में लिखा है कि पति की मृत्यु के बाद उनकी आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। परिवार को बच्चों की पढ़ाई, माता-पिता के इलाज और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने निवेदन किया है कि मानवीय आधार पर उन्हें उनके पति के स्थान पर या किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कलेक्टर दर पर नियुक्ति दी जाए। उन्होंने आवेदन पत्र के साथ पति का मृत्यु प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पहचान पत्र तथा परिवार विवरण से संबंधित दस्तावेज संलग्न करते हुए प्रशासन से मदद की अपील की है।

सिया की इस मांग को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सिया एक जिम्मेदार और मेहनती महिला हैं। उन्हें रोजगार मिलने से सिर्फ उनका परिवार सहारा नहीं पाएगा, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता और जनकल्याणकारी दृष्टिकोण भी सामने आएगा। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन सिया कोरचे की इस अपील पर क्या संज्ञान लेता है। हालांकि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से असहाय परिवारों को राहत प्रदान की जाती रही है। 

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