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पोड़ी उपरोड़ा अस्पताल में डेंटल मशीन खराब, मरीजों को हो रही भारी परेशानी, एक सप्ताह से अधिक समय से बंद पड़ी मशीन, उपचार के लिए मरीज इधर-उधर भटकने को मजबूर

पोड़ी उपरोड़ा अस्पताल में डेंटल मशीन खराब, मरीजों को हो रही भारी परेशानी, एक सप्ताह से अधिक समय से बंद पड़ी मशीन, उपचार के लिए मरीज इधर-उधर भटकने को मजबूर

पोड़ी उपरोड़ा:- स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डेंटल उपचार के लिए आई मरीजों को इन दिनों भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वजह है—अस्पताल में डेंटिस्ट तो मौजूद हैं, लेकिन पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से दांत की इलाज में प्रयुक्त मशीन खराब पड़ी है। इस कारण कई मरीजों का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल में दंत चिकित्सक नियमित रूप से मरीजों की जांच कर रहे हैं, लेकिन जिन मरीजों को मशीन से इलाज की आवश्यकता है, उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। डेंटिस्ट का कहना है कि एरोटर (दांत ड्रिलिंग मशीन) में तकनीकी खराबी आ गई है, और उसमें पानी नहीं आ रहा, जिसके चलते मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्थानीय निवासी प्रीति अग्रवाल, जो पिछले एक सप्ताह से दांत की गंभीर समस्या से जूझ रही हैं, ने बताया कि वह कई बार अस्पताल आई हैं, लेकिन हर बार उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि मशीन खराब है। "दांत में तेज दर्द है, लेकिन इलाज नहीं मिल रहा। हर बार कहा जाता है कि मशीन सुधरने पर ही इलाज हो पाएगा," उन्होंने नाराजगी जताई।

इस संदर्भ में जब बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) डॉ. दीपक सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मशीन में आई तकनीकी खराबी की सूचना उच्च अधिकारियों को पहले ही दे दी गई है। “मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द मशीन सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी,” उन्होंने भरोसा दिलाया।

हालांकि, अस्पताल प्रबंधन द्वारा उच्च अधिकारियों को जानकारी देने के बावजूद अब तक तकनीकी ऑपरेटर या रिपेयरिंग टीम मौके पर नहीं पहुंची है। इसका सीधा खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो समय पर उपचार न मिलने के कारण दर्द और असुविधा झेल रहे हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द मशीन की मरम्मत कराए, ताकि डेंटल मरीजों को राहत मिल सके। साथ ही, अस्पताल में आवश्यक उपकरणों की नियमित जांच और रख-रखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से मरीजों को दो-चार न होना पड़े।



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