अकालतरा तहसील के ग्राम झलमला में समय से पहले बारिश ने मचाई तबाही, किसानों की रबी फसल पूरी तरह बर्बाद किसानों के चेहरे पर मायूसी, कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी
रिपोर्ट : नानक राजपुत ( कोरबा )
जांजगीर-चाम्पा:- जिले के अकालतरा तहसील के ग्राम झलमला में इस बार मौसम की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जहां किसान रबी फसल से अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाकर बैठे थे, वहीं समय से पहले आई भारी बारिश ने उनकी मेहनत को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। गांव के अधिकांश किसान रबी सीजन में धान की खेती करते हैं। किसान झलमला सरपंच कासी राम निर्मलकर ने बताया कि धान की बालियाँ निकलने ही वाली थीं, लेकिन अचानक हुई भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया और फसल जलमग्न हो गई। अब धान सड़ने लगी है, जिससे न केवल पैदावार की संभावना समाप्त हो गई है, बल्कि कर्ज चुकाने की चिंता भी सिर उठाने लगी है।
सरपंच ही नहीं, झलमला के कई किसान जैसे रामप्रताप कश्यप, तुलाराम निर्मलकर, राधेश्याम निर्मलकर, देवन निराला, परदेशी निर्मलकर, फेकू निर्मलकर इसी मुसीबत से जूझ रहे हैं। कई किसानों ने कर्ज लेकर बीज, खाद और दवाई खरीदी थी, ताकि अच्छी फसल हो और वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। लेकिन बारिश की मार ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। किसान सोमसाय, रामकुमार और रामधनी ने भी बताया कि खेतों में इतना पानी भर गया है कि अब बुआई तो छोड़िए, खेत में घुसना भी मुश्किल हो गया है।
प्रशासन की बेरुखी से और बढ़ा किसानों का दुख
जहां एक ओर किसान फसल की बर्बादी से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की निष्क्रियता भी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। गांव के लोगों ने बताया कि अब तक न कोई सर्वे टीम गांव पहुंची है और न ही कोई अधिकारी स्थिति का जायजा लेने आया है। नतीजतन, किसानों को मुआवजे की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द गांव का दौरा करे, फसल नुकसान का सर्वे करवाया जाए और किसानों को उचित राहत राशि प्रदान की जाए, ताकि वे दोबारा खेती के लिए तैयार हो सकें और कर्ज के बोझ से उबर सकें।
कृषि विभाग और जिला प्रशासन से अपील
किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से गुहार लगाई है कि वे स्थिति की गंभीरता को समझें और फसल नुकसान का मूल्यांकन कराकर त्वरित राहत मुहैया कराएं। साथ ही, जिन किसानों ने बैंकों से ऋण लिया है, उनके लिए कर्ज माफी या पुनर्गठन जैसी योजनाओं पर विचार किया जाए। इस प्राकृतिक आपदा ने जहां किसानों की मेहनत को बर्बाद कर दिया है, वहीं प्रशासन की लापरवाही ने उनकी पीड़ा को और गहरा कर दिया है। यदि समय रहते राहत कार्य शुरू नहीं हुए, तो आने वाले समय में ग्रामीण अंचलों में कृषि कार्य पूरी तरह ठप पड़ सकता है और इसका प्रभाव खाद्यान्न आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।


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