युक्तियुक्तकरण की मार: आदिवासी समुदाय के 42 सहित 90 मानदेय शिक्षक बेरोजगार, वर्षों की सेवा पर लगा विराम:
कोरबा :- शिक्षा व्यवस्था में युक्तियुक्तकरण के नाम पर चल रही प्रक्रिया ने कई परिवारों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। वर्षों से स्कूलों में अल्प मानदेय पर निष्ठा और सेवा भाव से कार्य कर रहे 90 शिक्षक अब बेरोजगारी के कगार पर हैं। इनमें विशेष संरक्षित जनजातियों — पहाड़ी कोरवा, बिरहोर और पंडों समुदाय के 42 शिक्षक भी शामिल हैं, जो अब पुनः मुख्यधारा से कटते जा रहे हैं।
इन शिक्षकों ने नायब तहसीलदार दीपक पटेल को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पुनः बहाली की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में चल रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के चलते जहां एक ओर नियमित शिक्षकों की पदस्थापना हो रही है, वहीं मानदेय पर वर्षों से कार्य कर रहे अनुभवी शिक्षकों को दरकिनार किया जा रहा है। ज्ञापन में शिक्षकों ने उल्लेख किया है कि उन्होंने शासकीय विद्यालयों में बेहद सीमित संसाधनों के बीच भी समर्पणपूर्वक कार्य किया, जिससे केवल परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार आया, बल्कि विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में भी बड़ी भूमिका निभाई। इन शिक्षकों का आग्रह है कि उनके अनुभव, कार्यनिष्ठा और समुदाय विशेष के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आगामी शिक्षा सत्र 2025–26 में उन्हें पुनः शिक्षण कार्य हेतु समायोजित किया जाए।
"कांग्रेस से जिलाध्यक्ष मनोज चौहान ने कहा की ये केवल शिक्षक नहीं हैं, बल्कि पुल हैं समाज और हाशिए पर खड़े समुदाय हैं, आदिवासी शिक्षकों की पीड़ा सुने सरकार।
कांग्रेस से जिला अध्यक्ष मनोज चौहान ने कहा की जहां एक ओर सरकार शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं हाथों को पीछे कर रही है जिन्होंने सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाई। समाज और प्रशासन से अब यह सवाल है कि क्या 'युक्तियुक्तकरण' का अर्थ केवल तकनीकी समायोजन है, या फिर इसमें मानवीय पहलुओं की भी कोई जगह है?

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