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सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों की सेवा समाप्ति से कर्मचारियों में निराशा, मुख्यमंत्री से लगाई गुहार: कहा- सेवा यथावत रखी जाए

सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों की सेवा समाप्ति से कर्मचारियों में निराशा, मुख्यमंत्री से लगाई गुहार: कहा- सेवा यथावत रखी जाए

कोरबा:- जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) कोरबा के तहत संविदा पर नियुक्त सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों की सेवा समाप्त किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस फैसले से नाराज एवं निराश कर्मचारी अपनी पीड़ा लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मिले। यह मुलाकात 'सुशासन तिहार' के अंतर्गत राजकम्मा के मदनपुर मे आयोजित समाधान शिविर में हुई, जहाँ पीड़ित कर्मचारियों ने अपनी सेवा समाप्ति को लेकर मुख्यमंत्री से गुहार लगाई।

कर्मचारियों का कहना है कि वे विगत एक वर्ष से पशु चिकित्सा विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों जैसे टीकाकरण, बधियाकरण, उपचार और कृत्रिम गर्भाधान जैसे कार्यों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अंजाम दे रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक सेवा समाप्त किए जाने से उनकी आजीविका तो प्रभावित होगी ही, साथ ही क्षेत्र में पशु चिकित्सा से संबंधित जरूरी सेवाएं भी ठप पड़ जाएंगी। उन्होंने बताया कि 11 दिसंबर 2024 मे जिला खनिज न्यास मद से नियुक्त 26 सहायक कर्मचारियों को मात्र एक वर्ष के लिए संविदा पर रखा गया था, लेकिन बाद में उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि सेवा अवधि में वृद्धि की जाएगी। इसके बावजूद, एक माह पूर्व उन्हें जानकारी मिली कि कोरबा जिले में उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है। खास बात यह है कि अन्य जिलों में कार्यरत सहायक कर्मचारियों की संविदा अवधि बढ़ा दी गई है, परंतु कोरबा जिले में ही उन्हें हटाया जा रहा है।

पीड़ित कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री स्वयं कह चुके हैं कि कोरबा जिले में DMF की राशि की कोई कमी नहीं है, तो फिर क्यों केवल कोरबा जिले में उनकी सेवाएं समाप्त की गईं? क्या यह विभागीय भेदभाव का मामला है या फिर प्रशासनिक कमजोरी? मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान कर्मचारियों ने यह मांग रखी कि जब तक नियमित पदों पर भर्ती नहीं होती, तब तक उनकी संविदा सेवाएं यथावत रखी जाएं। यदि उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं, तो वे बेरोजगारी के संकट में घिर जाएंगे, जिससे उनका पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होगा।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री की संवेदना और कर्मचारियों की अपील के बाद प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है और क्या कोरबा के इन संविदा कर्मचारियों को न्याय मिल पाएगा?

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