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कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्र पोड़ी विकास खंड में नदी किनारे विशाल सेमल वृक्षों की अवैध कटाई, पेड़ माफियाओं का बड़ा खेल! प्रशासन की अनदेखी से पर्यावरण को भारी नुकसान, बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका

 कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्र पोड़ी विकास खंड में नदी किनारे विशाल सेमल वृक्षों की अवैध कटाई, पेड़ माफियाओं का बड़ा खेल! प्रशासन की अनदेखी से पर्यावरण को भारी नुकसान, बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका

कोरबा जिले के ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर पुराने और विशालकाय सेमल वृक्षों की अवैध कटाई की जा रही है। खासकर नदी किनारे स्थित सैकड़ों वर्षों पुराने पेड़ बिना किसी प्रशासनिक अनुमति और पंचायत NOC के अवैध रूप से काटे जा रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पेड़ माफियाओं के गिरोह इस अवैध कटाई में संलिप्त हैं, और प्रशासन पूरी तरह मौन है। इन पेड़ों को काटकर लकड़ी जिले से बाहर भेजी जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक सुनियोजित तस्करी का मामला है।

बाढ़ का खतरा बढ़ने की संभावना, गांवों पर संकट

नदी किनारे लगे ये वृक्ष न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं बल्कि बरसात के सीजन मे बाढ़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाते हैं। जब ये पेड़ कटते हैं, तो बारिश के दौरान नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, नदी किनारे के पेड़ों की कटाई से मिट्टी का क्षरण तेजी से होगा, जिससे नदी की धारा में बदलाव आ सकता है और आसपास के खेत और गांव इसकी चपेट में आ सकते हैं।

प्रशासन को भनक तक नहीं, पेड़ माफिया बेलगाम!

यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि इस अवैध कटाई की जानकारी प्रशासन को नहीं है। स्थानीय वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। दरअसल, किसानों को अपने निजी उपयोग के लिए कुछ पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जाती है, लेकिन इसके लिए पंचायत से NOC लेना अनिवार्य है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि इस नियम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। किसान निजी जरूरतों के नाम पर अनुमति लेकर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई कर रहे हैं, और इन लकड़ियों को तस्करों के हाथों सौंप रहे हैं यह नियम विरुद्ध कार्य है। 

वन विभाग कार्रवाई से पीछे, राजस्व विभाग के अधीन पेड़, ग्रामीणों का विरोध, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

वन विभाग की एक बड़ी मजबूरी यह भी है कि ये सभी कटे हुए पेड़ राजस्व भूमि पर स्थित हैं। चूंकि यह वन विभाग के क्षेत्र में नहीं आते, इसलिए वे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते। इसी वजह से पेड़ माफिया बेखौफ होकर कटाई कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर लकड़ी की तस्करी हो रही है। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि अगर इस पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में विशाल वृक्षों की संख्या नगण्य रह जाएगी और नदी में आने वाली बाढ़ से भारी तबाही मच सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस अवैध कटाई की गहन जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

कोरबा जिले के पोड़ी विकास खंड में हो रही यह अवैध कटाई केवल पर्यावरण के लिए खतरा नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में बाढ़ और जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है। प्रशासन को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा और पेड़ माफियाओं के इस गोरखधंधे को तुरंत रोकना होगा। यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो इसका खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा।



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