लेन्टाना पौधे कों नस्ट करने की योजना मे लीपापोती, वन विभाग की एक और कारामात, लेन्टाना बिना उखाड़े ही राशि डकार गए रेंजर व अधिकारी।
रिपोर्ट :- नानक राजपुत
क्या है लेन्टाना योजना
दरसल यह जंगली पौधा है जिसमे काटे दार तने होते हैं जिसकी झाडिया जंगलो मे पैर पसारी होती हैं जिन्हे नस्ट नहीं किया गया तों अपने चपेट मे कई औसधीया भी तबाह कर देती हैं वही वन विभाग ने इस पौधे कों पूरी तरह से खत्म करने के उद्देश्य से लेन्टाना उन्मूलन योजना लागू की जिसके तहत वन तथा आस पास के हर क्षेत्रो मे इस पौधे कों नस्ट करने के निर्देश दिए।
वही कोरबा जिले में वन विभाग के अधिकारीयों की बात करे तों योजनाओं के नाम पर बंदरबांट करते हुए विभिन्न मदों से जारी होने वाली राशि में सरकार को चूना लगा रहे हैं। कई गड़बड़ियां पहले भी उजागर हुई हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती होती आई है। कटघोरा वन मंडल में एक बार फिर लेन्टाना (जंगली पौधा) उन्मूलन के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए की गड़बड़ी उजागर हुई है। यह कहना गलत नहीं होगा कि लेन्टाना उन्मूलन कमाओ-खाओ योजना बनाकर रह गई है। आखिर जंगल में कितना लेन्टाना कहाँ-कहाँ उखाड़ा गया, यह देखने कौन जाता है, कागजों में लेन्टाना उखाड़ने के बाद उसका भौतिक सत्यापन भी हो जाता है और राशि भी निकल जाती है लेकिन लेन्टाना वहीं का वहीं रह जाता है।
जिस कक्ष में लेंटाना नहीं कागजो मे दर्ज हैं लेंटाना
सूत्रो के मुताबिक कुल 38 कम्पार्टमेंट में काम स्वीकृत किया गया। पसान रेंज के 9, केंदई रेंज के 20, चैतमा रेंज के 2 और ऐतमानगर रेंज के 7 कंपार्टमेंट (कक्ष) में लेंटाना उन्मूलन का कार्य कराया गया जबकि इनमें से करीब 10 ऐसे कम्पार्टमेंट हैं जहाँ लेंटाना है ही नहीं बल्कि रिकार्ड में भी छिंद घास दर्ज है, वहां भी लेंटाना के नाम से पैसा गबन कर लिया गया है। वही अब मामले उजागर होने के बाद जिला प्रसासन किस तरह जांच करतीं है यह गौर करने वाली बात होगी।

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