रिपोर्ट :- नानक राजपुत
पोड़ी उपरोड़ा विकास खंड के ग्राम बाला मे सप्ताहि हाट बाजार बीते कई वर्षो से संचालित है दूर दराज के ग्रामीण राशन हरि सब्जी व अन्य जरूरत कि सामग्री खरीदने प्रति सप्ताह आते हैं दुरस्त क्षेत्र होने के कारण बाला का सप्ताहिक बाजार मे काफी भीड़ होती है लेकिन साफ सफाई कों लेकर सरपंच सचिव का ध्यान नहीं वही व्यापारीयों से कर वसूली कि रसीद भी नहीं दी जाती पूरी तरिके से मनमानी कि जा रहि वही ग्रामीण बताते हैं कि सचिव द्वारा ग्राम के पंच से बाजार कर वसूली करवाया जाता ह जहाँ शाम होते ही वसूल किये गए राशि कि जमकर मुर्गा दारू पार्टी कि जाती है।
बिना ठेका व रसीद के जारी है वसूली, हिसाब किताब का अता पता नहीं, हर सप्ताह दारू मुर्गा पार्टी। सचिव कि मनमानी।
हाठ बाजार कि नीलामी प्रति वर्ष कि जाती है जहा कई ठेकेदार दार नीलामी मे शामिल होकर अपनी अपनी दावेदारी पेश करते हैं और अधिक बोलि लगाने वाले ठेकेदार बाजार से कर वसूली करते हैं, दरसल नियमतह प्रत्येक मार्च महिने मे बाजार का ठेका होना चाहियें जहा ठेकेदार को 31 मार्च तक के समया अवधि तक कर वसूली करने का अधिकार है, आपको बता दे कि प्रति वर्ष बाजार ठेका खत्म होने से पहले ग्राम सभा बैठक कर अनुमोदन किया जाता है वही दिन तिथि तय कर समाचार पत्र के माध्यम से विज्ञापन जारी किया जाता है विज्ञापन इसलिए दिया जाना चाहिए ताकि अन्य स्थानों से ठेकेदार इस बोलि मे सम्मिलित होकर दावेदारी कर सके। लेकिन बाला मे एक बार भी बाजार का ठेका नहीं हुआ जहाँ पंचायत के द्वारा ही कर वसुला जा रहा लेकिन बाजार मे मिले राशि का कोई हिसाब किताब नहीं ग्रामीण बताते हैं कि सचिव ने किसी पंच कों राशि वसूलने कि जिम्मेदारी दी जहाँ प्रति हप्ता वसूली करने के बाद जमकर दारू मुर्गा कि पार्टी भी कि जाती है, वही सचिव ने बताया कि वह कोनकोना के बैंक मे हर महीने बाजार कि राशि जमा करवाता ह जिसे जरूरत पड़ने पर आहरण भी कि जाती है वही ज़ब हमने आय व्यय कि जानकारी चाही तों गोलमोल जवाब देने लगे और कहा कि पिछले वर्ष बाजार का ठेका हुआ था लेकिन इस वर्ष बाजार का ठेका नहीं हुआ है।
वही सप्ताहिक बाजार मे व्यापारी के साथ साथ आमजन भी परेशान है क्युकी भारी बरसात मे राह चलने के लिए कोई उचित व्यवस्था भी नहीं कि गई थी जहाँ बरसात कों तों जैसे तैसे काट लिए लेकिन अब भी गंदगी फैली है उसका क्या, एक ओर जहाँ सचिव राशि का उपयोग बाजार मे ही करने कि बात करते हैं वही दूसरी ओर सच्चाई देखने पर बाजार कि हालात उजागर होती है वही अब देखना होगा कि इस मामले मे ग्राम बाला कि व्यवस्था कब तक सुधर पाती है।

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