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3 वर्षो से निजी कच्ची मकान मे संचालित शासकीय प्राथमिक विद्यालय, अती जर्जर हालात मे भवन, बच्चों कि पढ़ाई हो रहि बाधित।


रिपोर्ट :- नानक राजपुत



 केंद्र सरकार का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ग्रामीण स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रहि है, बच्चे ग्रामीण क्षेत्रो मे शिक्षा को लेकर असहज महसूस कर रहे क्युकी उन्हें पढ़ने के लिए अच्छी भवन नहीं मिल रहि, ब्लाक में दर्जनो शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं, जो बारिश में गिरने की कगार पर आ गए हैं वही कक्षाएं लगाने के लिए शिक्षा विभाग को जगह तलाशनी पड़ रही हैं। कहीं निजी भवन स्कुल संचालित हो रहि तो कहीं आंगनबाड़ी केन्द्र मे कक्षाएं लगाने शिक्षक मजबूर हैं। इसके बाद भी विभाग न तो भवनों की मरम्मत करा रहा है और न ही नए भवन के लिए कोई प्रक्रिया शुरू कि जा रहि।


मकान मालिक को आई रहम, निस्वार्थ भाव से अपना घर दिया, बच्चों के भविष्य के साथ न हो खिलवाड़ 

 पोड़ी उपरोड़ा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पाली के आश्रित मोहल्ला कर्मीआमा का जहाँ भवन अती जर्जर होने के वजह से विगत 3 वर्षो से एक किसान मोहन सिंह कोराम के घर संचालित हो रहि है जबकि पड़ोसी गांव मे ही स्कुल जतन योजना के तहत एक स्कुल का जीर्णोद्धार किया गया लेकिन कर्मीआमा प्राथमिक शाला मरम्मत के लिए वँचित रहा गया, शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कई बार जिला प्रशासन को समस्या अवगत कराया गया लेकिन समस्या जस कि तस बनी है। वही मकान मालिक द्वारा बच्चों के भविष्य ना बिगड़े ये सोचकर निस्वार्थ भाव से अपना मकान दे दिया और खुद छोटे से मकान मे समस्याओ के बीच जीवन गुज़ार रहा।

घर मालिक के घर मेहमान आते हैं तो पढ़ाई होती है प्रभावित

जाहिर सी बात है हर किसी के घर मे मेहमान या कुछ कार्यक्रम आयोजित होते ही रहते हैं जिसके कारण मेहमानों का आना लगा रहता है उस बीच शिक्षक स्वतंत्र रूप से बच्चों को पढ़ाई नहीं करवा पाते संकोच करने लगते हैं कही किसी से कहा सुनी ना हो जाये, कह सकते हैं कि स्कूल भवन जर्जर होने के कारण विद्यार्थियों की बैठक व्यवस्था पूरी तरह से गड़बड़ा सी गई है, जिससे पढ़ाई प्रभावित तो हो रही है साथ ही निजी भवनों में खेल मैदान भी नहीं हैं बच्चे घर के आँगन मे खेलने को मजबूर हैं, बच्चे भी चाहते हैं कि भवन जल्द से जल्द बने ताकि बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सके, वही स्कूल के हेड मास्टर का कहना है कि निजी भवन मे संचालन करने मे काफ़ी परेशानी होती है क्युकी भवन मालिक घर के मेहमान आते है तो संतोष जनक हम बच्चो को नहीं पढ़ा पाते।


पोड़ी विकास खंड मे दर्जनों भवन अधूरे है इन स्कूलों के अलावा अन्य भवन भी जर्जर हैं, लेकिन उनकी भी मरम्मत नहीं कीया जा रहा। भले ही शिक्षा विभाग द्वारा बेहतर सुविधा व शिक्षा का दावा किया जाता है लेकिन वनाँचल क्षेत्रो मे उनके दावो कि पोल खोलती नजर आ रहि, अब देखना ये है कि बच्चो को कब तक भवन उपलब्ध हो पाता है 


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