कोनकोना, तानाखार व रामपुर में सरपंच सचिवों की लापरवाही: एसडीएम के निर्देशों की खुली अवहेलना, नेशनल हाइवे पर अब भी बने खतरे के हालात
पोड़ी-उपरोड़ा :- क्षेत्र में आवारा पशुओं की समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल रूप लेती जा रही है। पोड़ी-उपरोड़ा जनपद सभा कक्ष में कुछ ही दिन पूर्व एसडीएम टी.आर. भारद्वाज ने विशेष बैठक बुलाकर ग्राम पंचायतों के सरपंच सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पंचायत स्तर पर आवारा पशुओं को व्यवस्थित किया जाए। बैठक में पंचायती राज अधिनियम की धाराओं का उल्लेख करते हुए यह बताया गया था कि ग्राम स्तर पर गोठान अथवा एक बड़े क्षेत्र का घेराव कर गाय-बैलों को रखा जाए, ताकि वे सड़कों पर दुर्घटनाओं का कारण न बनें। बैठक के बाद कुछ ग्राम पंचायतों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन भी किया और आवारा पशुओं को व्यवस्थित कर नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए। लेकिन कोनकोना, तानाखार और रामपुर जैसे ग्राम पंचायतों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। इन क्षेत्रों के नेशनल हाइवे पर सुबह-शाम बड़ी संख्या में गाय और बैल बैठे नजर आते हैं, जिसके चलते आए दिन छोटे-बड़े सड़क हादसे हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर बैठे जानवरों से केवल यातायात बाधित नहीं होता है, बल्कि कई बार वाहन चालक अचानक सामने आ जाने वाले पशुओं से टकराकर गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। वहीं, जिन ग्राम पंचायतों ने एसडीएम के आदेशों का पालन किया है, वहां अपेक्षाकृत स्थिति बेहतर हुई है। वहां गायों को खेतों से नुकसान होने पर या सरपंचों के निर्देश पर तुरंत खदेड़कर व्यवस्थित स्थान पर पहुंचाया जाता है।
इसके उलट, कोनकोना, तानाखार और रामपुर पंचायतों के सरपंचों ने प्रशासनिक आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया है। कई बार पुलिस जवानों को भी हाइवे पर बैठी गायों को हटाने का कार्य करते देखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुलिसकर्मी बार-बार यह काम कर सकते हैं तो पंचायत स्तर पर भी यह व्यवस्था क्यों नहीं हो पा रही, अव्यवस्थित क्षेत्र में कई बार भारी संख्या में फ़सल नुकसान के कारण व्यवस्थित क्षेत्र में आवारा पशुओं को खदेड़ा जाता है। प्रशासन का मानना है कि सरपंचों की यह कार्यशैली सिर्फ लापरवाही नहीं है, बल्कि गैर-जिम्मेदारी भी है। एसडीएम ने साफ कहा था कि पंचायत स्तर पर व्यवस्था बनाना सरपंच की सीधी जिम्मेदारी है। बावजूद इसके यदि हाइवे पर लगातार गायें बैठी दिख रही हैं तो यह प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना का साफ उदाहरण है। ग्रामीणों की मांग है कि अब प्रशासन को ऐसे गैर-जिम्मेदार सरपंचों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, यातायात विभाग का कहना है कि लगातार सड़क पर बैठी गायों की वजह से दुर्घटना का खतरा बना हुआ है और जिले की छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इन सरपंचों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या फिर यह समस्या इसी तरह बरकरार रहती है।

0 Comments