जशपुर कुनकुरी*: आज के आधुनिक युग में जहां दहेज प्रथा समाज के लिए एक अभिशाप बन चुकी है, वहीं संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी इस कुप्रथा के विरुद्ध एक नई और सशक्त चेतना लेकर सामने आ रहे हैं। ऐसी ही एक मिसाल बनी हैं , *फुलंती दासी* और *बालेस्वर दास* जिन्होंने संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से न केवल दहेज मुक्त विवाह किया, बल्कि समाज में एक सशक्त संदेश भी दिया।
संत रामपाल जी के अनुयाई बताते हैं कि उन्होंने "सतलोक आश्रम" में संत रामपाल जी महाराज के प्रवचनों को सुनकर जाना कि दहेज लेना और देना दोनों ही पाप हैं। संत जी के अनुसार, "एक सच्चा भक्त कभी दहेज नहीं लेता और न ही अपनी संतान को धन के बदले बेचता है।"
समाज में एक नई सोच की शुरुआत संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के बीच अब दहेज रहित विवाह एक सामान्य बात हो गई है। बिना बैंड-बाजे, बिना दिखावे और पूर्णतः साधारण तरीके से विवाह संपन्न किए जाते हैं, जिसमें केवल सच्चे धर्म और ज्ञान का आदान-प्रदान होता है।
संत रामपाल जी के अनुयाइयों के अनुसार, "हमने सिर्फ सत्य ज्ञान, पवित्र जीवन और समाज सुधार को प्राथमिकता दी। हमारे विवाह में ना कोई खर्चा हुआ, ना कोई दहेज। यह विवाह नहीं, एक पवित्र बंधन था सतगुरु की कृपा से।"
संत रामपाल जी महाराज अपने प्रवचनों में बार-बार दहेज प्रथा को समाप्त करने की अपील करते हैं। उनका कहना है, "एक रमेणी वही श्रेष्ठ है जो दहेज के विरोध में खड़ी हो, और एक सच्चा पुरुष वही है जो दहेज को ठुकरा दे।"
इस प्रकार संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में फुलंती जैसी महिलाएं समाज को बदलने का कार्य कर रही हैं। वे एक नई दिशा दिखा रही हैं जहां विवाह पवित्र होता है, व्यापार नहीं। यदि समाज में हर व्यक्ति ऐसे ही सोचने लगे, तो निश्चित ही दहेज जैसी कुप्रथा का अंत निकट है।

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