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ग्राम पंचायतों में सचिवों की लापरवाही से ठप पड़े विकास कार्य, नवनिर्वाचित सरपंच अब भी प्रभार से वंचित, ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए करना पड़ रहा संघर्ष

 ग्राम पंचायतों में सचिवों की लापरवाही से ठप पड़े विकास कार्य, नवनिर्वाचित सरपंच अब भी प्रभार से वंचित, ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए करना पड़ रहा संघर्ष 

पोंडीउपरोड़ा:- पंचायत चुनाव संपन्न हुए तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन कई ग्राम पंचायतों में नवनिर्वाचित सरपंचों को अब तक प्रभार नहीं सौंपा गया है। परिणामस्वरूप, न केवल पंचायत के हितग्राहीमूलक कार्य बाधित हो रहे हैं, बल्कि नलजल योजना जैसी आवश्यक सेवाएं भी ठप पड़ गई हैं।

प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों को कई बार निर्देश जारी किए गए, यहां तक कि जनपद पंचायत पोड़ीउपरोड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी द्वारा दो बार कारण बताओ सूचना पत्र भी जारी किया गया है। इन पत्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि सचिव तत्काल सरपंच को प्रभार नहीं सौंपते हैं, तो उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1999 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। लेकिन, दुर्भाग्यवश अब तक प्रशासन की यह चेतावनियाँ कागज़ों तक ही सीमित रही हैं। नोटिस जारी होने के बावजूद कई सचिवों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। वे पंचायत कार्यालय में नजर नहीं आते, और गांव के विकास कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं।

ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए करना पड़ रहा संघर्ष, प्रशासन की निष्क्रियता से नाराज ग्रामीण

पंचायतों में जहां नवनिर्वाचित सरपंचों को प्रभार नहीं सौंपा गया है, वहां की स्थिति अत्यंत गंभीर है। कई गांवों में मोटर पंप खराब पड़े हैं, जिससे लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा। पंप की मरम्मत के लिए जरूरी फाइलें और स्वीकृतियां रुकी हुई हैं क्योंकि सरपंच को अधिकार ही नहीं सौंपे गए। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सचिवों की लापरवाही और प्रशासन की निष्क्रियता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। “तीन महीने से ज्यादा हो गए चुनाव को, लेकिन अभी तक हमारे गांव के सरपंच को काम शुरू करने नहीं दिया गया। सचिव आते ही नहीं पंचायत में। पंप खराब है, पानी नहीं मिल रहा, बच्चों की स्कूल की मरम्मत रुकी है। आखिर कब तक हम परेशान होते रहेंगे?” – एक ग्रामीण ने बताया।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

अब समय आ गया है कि प्रशासन चेतावनी देने के बजाय ठोस कदम उठाए। ऐसे सचिवों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए जो नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को जानबूझकर प्रभार नहीं दे रहे हैं। साथ ही, पंचायतों में विकास कार्यों को पटरी पर लाने के लिए उच्च अधिकारियों को स्वयं हस्तक्षेप करना चाहिए। यदि शीघ्र ही सरपंचों को प्रभार नहीं सौंपा गया, तो ग्रामीण जनता आंदोलन करने पर मजबूर हो सकती है। यह न सिर्फ जनप्रतिनिधियों का अपमान है, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी भावना के भी खिलाफ है। पंचायतों का कार्य संचालन सुचारू रूप से चले, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को अब गंभीरता से हस्तक्षेप करना होगा।


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