जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 12 मे सबकी नजर: इन दिग्गज प्रत्यासीयों की चुनावी मैदान मे उतरने की संभावना: जनता किसे देगी अपना साथ।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मे आरक्षण की प्रक्रिया तों पूरी हो गई अब अचार सहिता लगते ही चुनावों की तारीख भी घोषित हो जाएंगी वही पार्टी संगठन ने अपने सक्रिय कार्यकर्त्ताओ से विचार विमर्श लेना भी शुरू कर दिया है की किसे मैदान पे उतारा जाये फिलहाल इस त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मे किसी राजनीती दल क़ा विषेस प्रभाव नहीं रहता बल्कि इस चुनाव मे प्रत्यासीयों के व्यक्तित्व कों देखा जाता है, और उसी व्यक्तित्व की आधार पर जीत हासिल होती है और वे सिहासन पर बैठते हैं। कोरबा जिले मे 12 जिला पंचायत क्षेत्र हैं जिनमे जनताओं कों सबसे ज्यादा रोमांच क्षेत्र क्रमांक 12 मे ही देखने कों मिलेगी क्युकी इस क्षेत्र मे शिर्ष नेतृत्व कर्ता क्षेत्र के दिग्गज नेताओं के बीच चुनावी जंग होगी. ऐसे नेता जो लगातार जनताओं के बीच मे पैठ जमाये हुये हैं ऐसे मे जनताओं कों अपना नेता चुनना किसी चुनौती से कम नहीं होगी।
इस बार आरक्षण मुक्त से पुरुष वर्ग कों भी मिला मौका, जनता किसे देगी अपना साथ।
पिछली जिला पंचायत चुनाव मे 12 क्रमांक से महिला आरक्षित रहे जिसके कारण पुरुषो कों मौका नहीं मिला लेकिन चक्रअनुक्रम अनुसार इस बार पुरुषो कों भी मौका मिला जहाँ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सीधे तौर पे मैदान मे उतर रहे है संभावना जताई जा रहा की इस चुनाव मे दिग्गज नेताओ क़ा घमासान देखने कों मिल रहा है, ऐसे नेता जो पहले से ही अपनी छाप जनताओं के बीच छोड़ चुके हैं। पुरुष जनप्रतिनिधियों मे डॉ पवन, वीरेंद्र मरकाम, राम प्रसाद कोराम, लक्ष्मीकांत कवर, राय सिंह मरकाम, वही महिलाओ मे किरण मरकाम, कमला किंडो इन जनप्रतिनिधियों क़ा मैदान मे आने की संभावना जताई जा रहि है। वही बात करे बीजेपी किसे समर्थन देगी तों किरण मरकाम व डॉ पवन क़ा पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक मे अच्छी पहचान बन चुकी है चुकी पहले भी डॉ पवन की पत्नी जिला पंचायत सदस्य रह चुकी है वही अब मौका तलाश मे रहि है किरण मरकाम जो लम्बे समय से संगठन मे कार्य कर रहि हैं जिनका भूमिका महिलाओ के प्रति नेतृत्व के सराहनीय रहि है वही कमला किंडो क़ा भी संगठन से समर्थन की इक्षा जाहिर करने की बातें सामने आयी हैं। वही राम प्रसाद कोराम के 12 क्रमांक मे आने से बातें कही जा रहि की पोड़ी उपरोड़ा लोकल जनप्रतिनिधि क़ा संगठन साथ देवें।
इनका संभावना जनता किसे अपना साथ देगी।
आपको बता दे आदिवासी नेता व समाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र मरकाम ने अपना पहला दाँव पेच जिला पंचायत क्रमांक 12 मे खेलने की संभावना जता रहे हैं अगर जनताओं क़ा साथ रहा तों वे मैदान मे उतरेंगे वही जानकारी बताइ जा रहि की वे जनसंपर्क मे भी जुट चुके हैं वीरेंद्र ने लगतार क्षेत्र के जन हित मुद्दों कों लेकर आवाज उठाया है चाहे हाथी प्रभावित क्षेत्र मे नुकसान कों लेकर जो चाहे किसानो के हित मे समस्याएं हो जिसको लेकर कई बार प्रसासन के खिलाफ आंदोलन क़ा रास्ता अपनाया है जिससे कारगर भी शाबित हुई जहाँ समस्या क़ा निराकरण भी हुआ वही वीरेंद्र ने दावा किया कों जनप्रतिनिधि बतौर उन्हें अगर जनता साथ देते हैं तों निश्चित रूप से अपने क्षेत्र मे युही जनहित मुद्दों कों लेकर लड़ाई लड़ते रहेंगे।
डॉ पवन यू कहे तों डॉ पवन कों जिले मे कौन नहीं जानता ग्राम के हर एक कार्यक्रम मे डॉ पवन सिरकत करने पहुंच ही जाते हैं जनताओं मे आपसी भाई चारा डॉ पवन बखूबी निभाते हैं और निभाते आये हैं समाजिक कार्यक्रमों मे इनका जोरदार भागीदारी रहती हैं वही पूर्व मे भी जिला पंचायत सदस्य के रूप मे सेवा दे चुके हैं जहाँ इस क्षेत्र मे उनका अच्छा अनुभव रहा है लेकिन इस बार चुनाव थोड़ी कठिन होने वाली है।
क्युकी महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री किरण मरकाम भी 12 क्रमांक मे अपनी दावेदारी कर सकती हैं भाजपा पार्टी मे लम्बे समय से सक्रिय रूप से कार्य करने वाली महिलाओ के नेतृत्व कर्ता के रूप भी उभरती हुई महिला नेता है बात महिलाओ की आती है तों क्षेत्र मे महिलाओ से जुडी समस्याओ क़ा निराकरण करना सहजता से इन्हे आता है वही किरण मरकाम ने 2020 से 2025 तक जनपद सदस्य के रूप मे सेवा दी व 2010 से 2020 तक जनपद अध्यक्ष क़ा भी पद संभाला, बात अब चुनाव आयोग ने तय किया इस बार आदिवासी आरक्षित मुक्त करने की जहाँ पुरुष वर्ग की भूमिका अहम मानी जाती है इस बार बाजी किसके आएगी जनता तय करेगी। जिला खनीज न्यास संथन के शासि सदस्य भी हैं
गोंडवाना पार्टी से राय सिंह मरकाम की संभावना है, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण गोंडवाना गड़तंत्र पार्टी ने अपनी अच्छी पकड़ बना रखी है जिला पंचायत क्रमांक 12 मे 38 ग्राम पंचायत शामिल हैं जहाँ प्रायः आदिवासी की बहु संख्यक है वही पाली तानाखार मे वर्तमान विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम हैं जहाँ अधिक ग्रामो के सरपंच गोंडवाना समर्थन मे हैं हालांकि यह त्रिस्तरीय चुनाव मे पार्टी की विषेस भुमीका नहीं रहती क्युकी जनप्रतिनिधि जानता के बीच क्या सामनजस्य बैठाते हैं ये प्राथमिकता रहती है।
राम प्रसाद कोराम बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ता के रूप मे सेवा दिए वही ग्राम धवईपुर मे पिछले दो पंच वर्षीय उनकी पत्नी सारदा देवी कोराम सरपंच रहि वही राम प्रसाद उससे पहले तीन बार सरपंच रहे, जनपद सदस्य 2014 मे बने जीतकर कटघोरा के जनपद उपाध्यक्ष बने 2019 मे जनपद चुनाव लड़े फिर उपाध्यक्ष की दावेदारी लेकिन नहीं बने, अब राम प्रसाद कोराम भी जिला पंचायत क्र 12 से भागीदारी निभा सकते हैं।
युवा कांग्रेस महा सचिव लक्ष्मीकांत कवर भी मैदान पर हो सकते हैं दरसल युवा कांग्रेस की पाली तानाखार मे अच्छी पकड़ हैं जहाँ युवाओं की एक जुटता क़ा काफी सहयोग लक्ष्मीकांत कों मिल सकती है वही युवाकां पालीतानाखार विधानसभा अध्यक्ष अंकित ने युवा शिर्ष पर अच्छा नेतृत्व कीया है, दरसल लक्ष्मीकान्त धनरास के निवासी हैं जिनका रखाड़ प्रभावित इलाको मे जनताओं के बीच हो रहि समस्याओं क़ा खुलकर विरोध किया वही धूल डस्ट से परेशान करने वाली कम्पनीयों के खिलाफ कई बार आंदोलन किया है, वही बाते सामने आ रहि की लक्ष्मीकांत कांग्रेस की अनुशंसा से चुनाव लड़ सकते हैं।
पोड़ी उपरोड़ा निवासी जनप्रतिनिधि कमला किंडो क़ा भी मैदान मे चुनावी जंग हो सकता है बता दे जनताओं कों लोकल प्रत्याशी अधिक प्रिय रहते हैं वही कमला किंडो वर्तमान मे भी बीजेपी से महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष हैं व पूर्व मे भी जनपद सदस्य मे सेवा दे चुकी हैं लम्बे समय से राजनीती क़ा अनुभव रहा है बीजेपी संगठन से कमला समर्थन मांग की बाते सामने आ रहि हैं
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में जनता जिसे चुनेगी वह समाज के लिए अच्छा काम किया है और उसकी छवि जनता के बीच अच्छी है, तो उसके चुने जाने की संभावना अधिक होती है। जिस राजनीतिक दल से उम्मीदवार जुड़ा होता है, उस दल की स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर लोकप्रियता भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करती है। लोग उस उम्मीदवार को प्राथमिकता देते हैं, जो उनके क्षेत्र की समस्याओं को हल करने के लिए ठोस योजनाएं और वादे करता हो, जनता उसी व्यक्ति को चुनेगी जो उनके हितों और जरूरतों का बेहतर प्रतिनिधित्व करेगा
जिला पंचायत सदस्य चुनाव भारत के ग्रामीण और स्थानीय स्तर के चुनावों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह चुनाव राजनीतिक रूप से गरम माहौल और स्थानीय मुद्दों को लेकर चर्चा का केंद्र बन जाते हैं। इन चुनावों में राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी दावेदारी पेश करते हैं, जिससे मुकाबला और रोचक हो जाता है।

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