खड़ी फसल साथ-साथ जंगल की फसल भी बर्बाद हो गई, आखिर शिकायत करें तो करें कहाँ, कटाई के बाद किसानो द्वारा बड़ी आंदोलन की बनाई जा रहि रणनीति
रिपोर्ट :- नानक राजपुत
पूर्व मे ही किसानो ने चोटिया मे वृहद रूप से हाथियों से हो रहे नुकसान व फ़सल मुवावजा कों लेकर वन विभाग के खिलाफ आंदोलन किया था, जहाँ प्रसासन ने व्यवस्था सुधारने के साथ साथ मुवावजा मे विलम्ब नहीं करने की बात कही थी, लेकिन प्रशासन ने किसानो कों झूठा अस्वासन देकर आंदोलन समाप्त करवाया, नतीजा यह की आज भी किसान मुवावजे के बाट जोह रहे हैं। हम यह बात इसलिए कह रहे क्युकी एक तरफ जहां उनके क्षेत्र में हाथियों के द्वारा खड़ी फसलों को रौंद कर नुकसान पहुंचाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ नुकसान हुए फसल का मुआवजा बनाने की प्रक्रिया वन विभाग के कर्मचारी पूरी नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि उनकी फसल को देखने भी नहीं पहुंच रहे हैं जिसके कारण किसान हलाकान हैं। नाराज किसानों के द्वारा फसल कटाई के बाद पुनः एक बड़े आक्रोश प्रदर्शन की बात कही जा रही है।
किसान वीरेंद्र मरकाम ने बताया कि वन विभाग के खिलाफ किये गए आंदोलन मे प्रशासन ने झूठा आश्वासन दिया क्षेत्र हाथी प्रभावित है हालांकि जंगलो मे हाथी भ्रमण कर ही रहे हैं वही हाथी रहवासी इलाके मे भी पैर पसार रहे हैं व फसलों कों भी बर्बाद कर रहे हैं, जिस तरह से किसानो ने अच्छी फ़सल का पैदावार कर समर्थन मूल्य मे धान बिक्री करने की उम्मीद जताई थी लेकिन लेकिन उनके उमीदो पर हाथियों ने पानी फेर दिया, अब कुछ किसानो कों बैंक से लिए कर्ज भी चुकता करने के लिए काफी परेशानियों से गुजरनी पड़ेगी, पीड़ित किसानों ने कहा है कि अभी फसल की कटाई बहुत जोरों से चल रही है, उसके बाद तय स्थल पर बड़ी बैठक कर बड़ी योजना बनाएंगे।
एक-दूसरे बीट पर टाली जा रही बात
पीड़ित ने बताया कि 3-4 बार डिप्टी रेंजर से आग्रह किया है परन्तु उनकी टीम गुरसिया बीट/बंजारी बीट वाले फोटो खीचेंगे, प्रकरण तैयार करेंगे बोलकर, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहते हैं। ऐसे न जाने कितने प्रकरण हैं जो लम्बित हैं, अब ऐसे में व्यवस्था कैसे सुधरेगी? फिलहाल तहसीलदार को वन विभाग की लचर व्यवस्था से अवगत कराया गया है।

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