किसानों की परेशानी बढ़ी
दावा-आपत्ति के चक्रव्यूह में फंसा राजस्व अमला, पोर्टल बंद, ऐप तैयार पर डेटा गायब
शाषण से सीधा सवाल इस साल धान खरीदी होगी तो होगी कैसे ???
किसान बिना जानकारी के फसल विवरण निकाल के शून्य फसल दिखने का लगा रहे आरोप . कहते हैं, अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंसकर वीरगति को प्राप्त हुआ था। खाद्य विभाग के पोर्टल या भुईया" प्रणाली में अब किसान फंस रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी से पहले ग्राम सभाओं में प्राप्त दावा-आपत्तियों के निराकरण के लिए जारी आदेश अब मैदान में चक्रव्यूह बनकर उभर रहा है। राजस्व सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सभी आपत्तियों का निराकरण खाद्य विभाग के भौतिक सत्यापन ऐप के माध्यम से 31 अक्टूबर तक किया जाए। आदेश आधुनिक और तकनीकी दृष्टि
प्रभावशाली तो दिख रहा है, पर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
दरअसल, खाद्य विभाग के पोर्टल पर अधिकतर खसरा नंबर मौजूद ही नहीं हैं। इससे भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पा रही है। एक अधिकारी ने हँसते हुए कहा- "ऐप तो बना है,
पर डेटा नहीं है - जैसे बंदूक हो, पर गोली न हो। अब इस बंदूक से किसे मारें - सिस्टम को या समय-सीमा को ।
इधर, भुईया पोर्टल पर शासन ने "नवीन फसल प्रविष्टि" पहले ही बंद कर रखी है। ऐसे में पटवारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है, एक तरफ दावा-आपत्ति की तात्कालिक कार्यवाही का दबाव, दूसरी ओर ऑनलाइन सिस्टम की बंद राहें।
उधर किसानों को एग्रीस्टेक करा कर धान पंजीयन की बात की गयी है जिसमे हज़ारो खामियाँ हैँ!!
जैसे-1 नया पंजीयन कैसे होगा
2.वारिशान पंजीयन कैसे होगा
3. नया खसरा नंबर कैसे जुड़ेगा
3. एग्रोस्टेक अप्रूवल किससे होगा ?? पटवारी ना तहसीलदार किसी के पास नहीं जा रहा और समय बहुत ले रहा है
4. अगर एक किसान का 3 गांव मे खाता है तो उसको जोड़वाने वो 2-3 महीना से चक्कर लगा रहा है !!
*फसल सुधार पूरी तरह है बंद* केवल एक फसल से दूसरे फसल मे ही परिवर्तन है संभव
फील्ड स्तर पर काम कर रहे कर्मचारी कहते हैं कि "सिस्टम में खसरा नंबर ही नहीं है, तो ऐप में सत्यापन कैसे करें?" राजस्व विभाग के अधिकारी भी उलझन में हैं कि आदेश का पालन कैसे कराया जाए या आदेश को ही "दावा-आपत्ति" में डाल दिया जाए।
सूत्रों के अनुसार, कई जिलों से इस स्थिति की जानकारी राज्य स्तर पर भेजी जा चुकी है, लेकिन अमल का रास्ता अब भी बंद है।

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