पत्थलगांव--/
छठ पर्व के तीसरे दिवस आज सोमवार की शाम पत्थलगांव क्षेत्र के प्रसिद्ध भोलेनाथ की नगरी में कल कल कर बहती माण्ड नदी की पावन धारा में अस्ताचल भगवान भास्कर को प्रथम अर्घ्य के साथ छट पूजा बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। तीन-चार दिनों से ही माण्ड नदी के घाट एवं आस पास की सफाई में लोग जुट गये थे वही मन्दिर परिसर एवं माण्ड नदी घाट परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है जो देखते ही बन रही है। जिसमे रंग बिरंगी रोशनियां, प्रवेश द्वार, जगमगाती लाईट आदि सजावट से सजाया गया है, जिससे श्रद्धालुओं में भक्तिमय माहौल और मनोहारी बन गया।
छठ पर्व के प्रथम दिवस अस्ताचलगामी सूर्य देव को भक्तों ने दूध एवं नदी के पवित्र जल से अर्घ्य अर्पित कर अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। छठ पर्व पर पुरुषों की अपेक्षा पारंपरिक पोशाकों में महिलाओं की संख्या अधिक रही ,वही काफी संख्या में लोग पूरे परिवार के साथ श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा में शामिल हुए।
छठ व्रती परिवार में शामिल सिद्धेश्वर सिंह राजपूत उर्फ बिहारी बाबू ने कहा की “छट पूजा हमारे जीवन में सूर्य देव के प्रति अटूट श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। किलकेलेश्वर धाम के माण्ड नदी तट पर इसका महत्व बेमिसाल है,और हम लोग विगत कई वर्षों से प्रति वर्ष यहा के पवित्र नदी के तट पर छठ पर्व मनाते आ रहे हैं।
छठ पूजा के दौरान भजन और लोकगीतों की ध्वनि ने वातावरण को और रंगीन बना दिया। छोटे-छोटे बच्चे माता-पिता के साथ शामिल होकर उत्सव की रौनक बढ़ाते नजर आए।
इस वर्ष की छट पूजा ने किलकिला में श्रद्धा, उल्लास और सामूहिक भावनाओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। उत्सव की गरिमा और भव्यता ने सभी उपस्थित लोगों के चेहरे पर मुस्कान और श्रद्धा का भाव जगाया। 28 अक्टूबर को प्रातः उदयाचल गामी भगवान सूर्य देव की पूजा अर्चना कर छठ पर्व का पारन किया जावेगा।




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