सरकारी जमीन को फर्जी तरिके से बनाया निजी संपत्ति, बैंक से उठाया लाखों का कर्ज, गांव के निवासी नहीं निकले लोनधारी, खुलासा होते ही FIR दर्ज, पटवारी भावे पहले ही निलंबित, बैंक भी जांच के दायरे में।
कोरबा/ पोड़ी उपरोड़ा :- पोड़ी-उपरोड़ा तहसील क्षेत्र में सरकारी जमीन को निजी बताकर लाखों का कर्ज उठाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दो व्यक्तियों द्वारा लगभग 34 एकड़ सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से निजी संपत्ति दिखाकर ऋण पुस्तिका तैयार की गई और उसी के आधार पर जिले से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित बैंक से अनुमानित लाखों रूपये का लोन लिया गया। इस पूरे फर्जीवाड़े में पटवारी जितेंद्र भावे की संलिप्तता सामने आई थी जिसे पहले ही सस्पेंड किया जा चूका था। वहीं, इस मामले में फर्जी जमीन मालिक ( दोनों व्यक्तियों ) के खिलाफ कोरबी चौकी में FIR दर्ज की गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन दो लोगों के नाम पर ऋण पुस्तिका बनी थी, वे वास्तव में उस गांव के निवासी ही नहीं पाए गए। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी धांधली अब तक कहीं देखने को नहीं मिली। मामला तब खुला जब संबंधित हल्का क्षेत्र में नए आरआई और पटवारी की नियुक्ति की गई। जांच के दौरान जमीन संबंधी गड़बड़ी उजागर हुई और उच्च अधिकारियों तक इसकी जानकारी पहुंची। इसके बाद SDM, तहसीलदार, नयाब तहसीलदार कि कार्रवाई में यह बड़ा घोटाला सामने आया। फिलहाल बैंक प्रबंधन की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है और उसकी कार्यप्रणाली की जांच शुरू कर दी गई है।
जाने पूरा मामला, जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे
कलेक्टर अजित वसंत के निर्देश पर पोड़ी उपरोड़ा एसडीएम तुलाराम भारद्वाज के मार्गदर्शन में नायब तहसीलदार सुमन दास मानिकपुरी व टीम ने राजस्व भूमि से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। प.ह.नं. 20 रा.नि. कोरबी के लालपुर गाँव की 9.034 हेक्टेयर (लगभग 22 एकड़) सरकारी ज़मीन को फर्जी तरीके से शिवचरण पिता इतवारी (जाति महरा) के नाम दर्ज किया गया। उक्त भूमि को एक्सिस बैंक दुर्ग (UTIB0000590) में 30 सितम्बर 2024 को बंधक रखकर लाखों रुपये का लोन लिया गया। इसी तरह ग्राम घुचापुर प.ह.नं. 20 रा.नि. कोरबी की 4.595 हेक्टेयर (लगभग 11 एकड़) भूमि फर्जी तरीके से अजय यादव पिता हीरावन (जाति रावत) के नाम दर्ज की गई। यह ज़मीन IDFC फर्स्ट बैंक लिमिटेड बेमेतरा ब्रांच (IDFB00061411) में 30 सितम्बर 2024 को बंधक रखकर लोन लिया गया।
मौके पर खुलासा फर्जी मालिक का गाँव में नामोनिशान तक नहीं
नायब तहसीलदार सुमन दास मानिकपुरी व टीम ने मौके पर जाकर पाया कि दोनों ही व्यक्ति संबंधित ग्राम पंचायतों में रहते ही नहीं। जाँच रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि उन्हें फर्जी मालिक बनाया गया। कोरबी चौकी प्रभारी सुरेश कुमार जोगी ने जाँच रिपोर्ट व दस्तावेज़ी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 338, 346(3), 340(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। जाँच में पटवारी भावे ने खुद को निर्दोष बताते हुए पल्ला झाड़ा है कहा कि उसकी आईडी हैक हो गई होगी या डीएससी चोरी की गई होगी। उसने संदेह जताते हुए अपने ही एक परिचित पर आरोप लगाया और उसके खिलाफ अलग से शिकायत भी दर्ज कराई है।
बैंक भी जांच के घेरे में, जाँच टीम अब उन बैंकों तक पहुँचेगी जहाँ ऋण स्वीकृत हुआ है।
लोन प्रक्रिया में फोटो व दस्तावेजों की अनिवार्यता को देखते हुए बैंक मैनेजर व कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यदि बैंक की मिलीभगत पाई गई तो कड़ी कार्रवाई से इंकार नहीं किया जा सकता। बड़ा सवाल कि भूमि नामांतरण की प्रक्रिया बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के संभव नहीं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि सिर्फ पटवारी की आईडी से इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कैसे हुआ? NIC पोर्टल की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।आशंका है कि इस पूरे खेल में अन्य रसूखदार लोगों का भी हाथ हो सकता है। मामले की विस्तृत जाँच जारी है। अब देखना होगा कि पुलिस-प्रशासन इस घोटाले की गुत्थी को कहाँ तक सुलझा पाता है।

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