कटघोरा में हरी कृष्णा अस्पताल का लापरवाह रवैया, बायो मेडिकल वेस्ट फेके जा रहे हुकरा पहाड़ी पर, खेतों व ग्रामीणों की सेहत पर मंडराया खतरा
कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर खुलेआम लापरवाही की जा रही है। मामला है हरि कृष्णा अस्पताल का, जिस पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वह अपना बायो-मेडिकल वेस्ट सीधे ग्राम पंचायत हुंकरा की पहाड़ी पर फेंक रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल का खतरनाक कचरा इंजेक्शन की टूटी शीशियाँ, सुई और अन्य मेडिकल वेस्ट खुलेआम यहां फेंका जा रहा है। बरसात के दिनों में ये कचरे पानी के साथ बहकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुँच जाते हैं। इसका असर फसलों की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि खेतों में काम करते वक्त शीशा और सुई चुभने का खतरा लगातार बना रहता है। मवेशी चारा चरते समय कई बार टूटे हुए शीशों से घायल हो जाते हैं। जबकि कई बार मना करने और चेतावनी देने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने अपनी आदत नहीं बदली।बल्कि अब तो रात के अंधेरे में कचरा फेंकने की घटना बढ़ रही है।ग्रामीणों ने इस पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
दरसल बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 लागू हैं, जिनके तहत सभी अस्पताल, नर्सिंग होम और लैब को कचरे के निस्तारण की सख्त गाइडलाइन का पालन करना होता है। इस नियम के मुताबिक अस्पतालों कि जिम्मेदारी बनती है कि सुई, खून, पट्टियाँ, दवाइयाँ और अन्य खतरनाक कचरा किसी नाले या खेत में फेंकने की बजाय वैज्ञानिक तरीके से निपटाएँ, ताकि संक्रमण, बीमारी और प्रदूषण न फैले।साथ ही हर अस्पताल को वेस्ट जनरेशन और निस्तारण का रिकॉर्ड बनाए रखना और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रिपोर्ट देना जरूरी है। नियम के मुताबिक दवाइयो को अलग अलग बैग मे कलर के अनुसार रखकर केवल अधिकृत वाहन से ही निस्तारण स्थल तक ले जाया जा सकता है वही बायो-मेडिकल वेस्ट को 24 घंटे से अधिक नहीं रखा जा सकता। लेकिन इस हॉस्पिटल मे ऐसा कुछ नहीं। राजनीती सरक्षण कि आड़ मे नियमों कि धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत और आरोप बहुत ही गंभीर हैं। यदि प्रशासन तत्काल कार्रवाई नहीं करता, तो यह सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि इंसानों और जानवरों दोनों की जिंदगी पर भारी खतरा साबित हो सकता है

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