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कटघोरा वनमंडल अंतर्गत बंजारी के रावणभांठा जंगल में पेड़ो कि अवैध कटाई कर एकत्रीकरण, रात के अँधेरे मे तस्करी कि फिराक। वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल

कटघोरा वनमंडल अंतर्गत बंजारी के रावणभांठा जंगल में पेड़ो कि अवैध कटाई कर एकत्रीकरण, रात के अँधेरे मे तस्करी कि फिराक। वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल 

रिपोर्ट:- नानक राजपुत 



पोड़ी उपरोड़ा / बंजारी :- ग्राम पंचायत बंजारी के अंतर्गत आने वाले रावणभांठा जंगल, जो कि गुरसिया बीट क्षेत्र में स्थित है, वहां बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पेड कटाई का मामला सामने आया है। इस घटना की जानकारी ग्राम सरपंच और ग्रामीणों की तत्परता से सामने आई, जिससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

बंजारी सरपंच पति जजमान सिंह, उप सरपंच पति विनोद उर्रे, पंच भोला धनुहार व स्थानीय ग्रामीणों को सूचना मिली कि जंगल क्षेत्र में भारी मात्रा में धौरा व साजा नामक बहुमूल्य पेड़ों की कटाई कर लकड़ियाँ एकत्र की गई हैं। सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत गुरसिया बीट के संबंधित बिट गार्ड को इस संबंध में अवगत कराया। प्रारंभ में वन कर्मियों ने मामले को नजरअंदाज करने की कोशिश की, लेकिन सरपंच, उपसरपंच और ग्रामीणों के दबाव के चलते वन विभाग को हरकत में आना पड़ा। सूचना के आधार पर बिट गार्ड और अन्य वनकर्मी मौके पर पहुंचे, जहां ग्रामवासियों के साथ मिलकर जब स्थल का निरीक्षण किया गया तो सभी दंग रह गए। जंगल क्षेत्र में भारी मात्रा में लकड़ी काटकर जमा की गई थी, जो इस बात का संकेत है कि यह कार्य लंबे समय से चोरी-छिपे किया जा रहा था। यदि समय पर ग्रामीणों ने सूचना नहीं दी होती, तो रात के अंधेरे में यह लकड़ी तस्करी कर बाहर भेज दी जाती और वन विभाग को भनक तक नहीं लगती।

मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कटाई की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से नियमित निगरानी नहीं की जाती। ना ही फील्ड में कोई गश्त होती है और ना ही समय-समय पर बीट क्षेत्र का निरीक्षण किया जाता है। फिलहाल इस अवैध कटाई के पीछे किन लोगों का हाथ है, इसकी जांच की जा रही है। वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चाधिकारियों को जानकारी भेज दी है। वहीं ग्रामीणों की मांग है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए क्षेत्र में नियमित गश्त और कड़ी निगरानी की व्यवस्था की जाए।

यह घटना वन विभाग की निष्क्रियता और लापरवाही की पोल खोलती है। सवाल यह उठता है कि अगर सरपंच और ग्रामीण सक्रिय नहीं होते, तो क्या यह अवैध कटाई यूं ही जारी रहती? क्या वन विभाग को जंगल की सुरक्षा का जिम्मा सौंपना सही है, जब उसकी ओर से फील्ड विजिट तक नहीं किए जाते? ग्रामवासियों ने वन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जो भी लोग इस अवैध कटाई में शामिल हैं, उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई जंगल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत न कर सके। इस घटना के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि गुरसिया बीट में वन विभाग की निगरानी प्रणाली पूरी तरह से विफल हो चुकी है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जंगल की जैव विविधता और पर्यावरण को भारी क्षति हो सकती है।

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