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पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 17वें दिन भी जारी, नए सरपंचो को प्रभार नहीं, पंचायत कार्य ठप, जनता परेशान।

पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 17वें दिन भी जारी, नए सरपंचो को प्रभार नहीं, पंचायत कार्य ठप, जनता परेशान। 

छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल 17वें दिन भी जारी है। इस हड़ताल के चलते पंचायतों में सभी प्रकार के कार्य ठप हो गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जनता को भी विभिन्न सरकारी योजनाओं और आवश्यक प्रशासनिक सेवाओं से वंचित होना पड़ रहा है।

विधानसभा चुनाव में किए गए वादे का अब तक नहीं हुआ पालन, जंतर मंतर मे करेंगे आंदोलन

सचिवों के आयोजित रूप रेखा के अनुसार 7 अप्रेल को सभी सचिव रैली निकलकर कलेक्टर को ज्ञापन सौपेंगे उसके बाद 8अप्रेल से 19 अप्रेल तक जनपद स्तर मे योजना बद्ध तरिके विरोध प्रदर्शन करेंगे व 20 अप्रेल को दिल्ली के लिए रवाना होने साथ ही 21 अप्रेल को जंतर मंतर मे अनिश्चित कालीन हड़ताल करेंगे। 

दरसल विधानसभा चुनाव 2023-24 के दौरान केंद्र सरकार द्वारा पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की गारंटी दी गई थी। बीते 7 जुलाई 2024 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री, तथा घोषणा पत्र के संयोजक सांसद दुर्ग की उपस्थिति में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण को आवश्यक माना गया था और जल्द से जल्द इस मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके कारण पंचायत सचिव अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए हैं।

नए सरपंचों को नहीं मिला प्रभार, प्रशासनिक कार्य ठप

वर्तमान मे हुए पंचायत चुनावों के बाद नव-निर्वाचित सरपंचों को अभी तक प्रभार नहीं सौंपा गया है। इसका परिणाम यह हुआ कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में किसी भी प्रकार के प्रशासनिक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। यहां तक कि किसी भी सरकारी दस्तावेज़ या फाइल पर हस्ताक्षर करने का अधिकार भी उनके पास नहीं है। इससे पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गति पूरी तरह ठप हो गई है।

ग्रामीण जनता को हो रही परेशानियां, सरपंच संघ भी करेगा आंदोलन

पंचायत सचिवों की हड़ताल के चलते विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। कई आवश्यक योजनाओं से जुड़े कार्य लंबित पड़े हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग, विशेषकर किसान और गरीब वर्ग, इस हड़ताल के चलते सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पंचायत सचिवों की हड़ताल के चलते अब सरपंच संघ ने भी आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है, सरपंच संघ द्वारा कल कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौपने की बाते सामने आ रही है, उनका कहना है कि जब तक उन्हें प्रभार नहीं सौंपा जाता, तब तक वे भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे। यदि सरपंच संघ भी हड़ताल में शामिल होता है तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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