मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म, सुरभिगौ सेवा समिति, एसजेआर की टीम व सरपंच नें विजयपुर की वृद्ध माता क़ा अन्तिम संस्कार किया।
संसार मे कार्य तो विभिन्न हैं लोग समाज मे तरह तरह के कार्य कर पुण्य के भागीदार बन रहे हैं लेकिन कुछ समाज सेवी व संस्था ऐसे कार्य करते हैं जो पुण्य के भागीदार तो बनते ही हैं साथ ही एक अच्छे व भाग्यशाली मानव होने क़ा परिचय भी देते हैं, लखनपुर गांव के नजदीक विजय पुर की रहना वाला एक परिवार अत्यंत गरीबी का मार झेल रहे है उसी परिवार की वृद्ध माता की कल मृत्यु हो गई, अत्यंत गरीब तबके की जीवन जी रहे इस परिवार के पास कपड़े के अलावा अन्य साधन उपलब्ध नहीं थे उस परिवार की एक वृद्ध माता क़ा देहांत होनें उपरांत गांव के सरपंच नें सुरभि गौ सेवा समिति के सदस्य गुरमीत सिंह को सहयोग करने की बात कही जहाँ गुरमीत नें एसजेआर की टीम से सम्पर्क कर वृद्ध माता क़ा अन्तिम संस्कार किया, टीम नें उन तमाम जरूरतो के इंतजाम किये जो अंतिम संस्कार के लिए जरूरी होते हैं वही दोनों टीम नें वृद्ध माता को कंधा देते हुए शव को दफन स्थल तक लेकर पहुचे जहाँ मिट्टी की खोदाई निर्धारित गहराई पर की गई वही मृत शरीर को धरती माता पर समर्पित करते हुए दफन कर भगवान से मृत आत्मा की शांति प्रार्थना की.
मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है मानवता की सेवा करना सबसे पुण्य कर्म है। दूसरों की सहायता करना, उनकी जरूरतों को समझना और उनके दुःख को बांटना ही सच्चा धर्म है। यह बात हर धर्म और संस्कृति में कही गई है। जब हम निस्वार्थ भाव से किसी की मदद करते हैं, तो न केवल हम उनके जीवन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि खुद के जीवन में भी सकारात्मकता और शांति लाते हैं। यह विचार प्रेरणादायक है और समाज में इसे अपनाने से हम एक बेहतर समाज को जागरूक कर सकते हैं। यह माता अपने बेटे और पोते के साथ रहती थी, आर्थिक रूप से काफी कमजोर थी, और दोनों क़ा पालन पोसण करतीं थी, गौ सुरभि संस्थान व एसजेआर के टीम नें सहयता करते हुए अन्तिम संस्कार किया सहयोग मे गुरमीत सिंह,ज्योति प्रकाश, भुनेश्वर यादव, अपूर्व गुप्ता, शन्नी गुप्ता, अनमोल यादव, सरपंच विश्राम कवर एवं कुछ गांव के लोग सहयोग प्रदान किये।

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