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कोरबा जिले में बांग्लादेशी घुसपैठियों की अनुपस्थिति बनी चिंता का विषय, अन्य जिलों में बढ़ती सक्रियता, कोरबा में शांति बना संशय क़ा विषय।

कोरबा जिले में बांग्लादेशी घुसपैठियों की अनुपस्थिति बनी चिंता का विषय, अन्य जिलों में बढ़ती सक्रियता, कोरबा में शांति बना संशय क़ा विषय।

कोरबा – छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन कोरबा जिले में इनकी अनुपस्थिति ने सुरक्षा एजेंसियों को हैरान कर दिया है। जहां रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे क्षेत्रों में इनकी पकड़ मजबूत होती दिख रही है, वहीं कोरबा में इस प्रकार की कोई स्पष्ट गतिविधि सामने नहीं आई है।

दरसल कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद से पुलिस पूरे जिले भर में बांग्लादेशियों और दूसरे राज्यों से आए लोगों की जांच करने में जुटी हुई है, वही कोरबा जांजगीर क़ा पड़ोसी जिला रायगढ़ मे भी पश्चिम बंगाल से आकर बिना सुचना के निवास क़र रहे थे, जिस पर कार्यवाही कि गई और भी अन्य जिलों में बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध रूप से रहने और फर्जी दस्तावेजों के सहारे पहचान बनाने के कई मामले उजागर हुए हैं, लेकिन कोरबा जो कि औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है और बड़ी जनसंख्या व प्रवासी कामगारों का केंद्र भी है, वहां इस तरह की गतिविधियों की रिपोर्ट न आना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहरी लोगों की आवाजाही यहाँ भी होती है, लेकिन पहचान करना कठिन होता है। सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यह अनुपस्थिति या तो प्रशासन की सतर्कता का संकेत हो सकती है, या फिर यह संकेत भी हो सकता है कि घुसपैठियों ने खुद को बड़ी चालाकी से छिपा रखा है। कुछ अनुभवीयों का कहना है कि कोरबा की औद्योगिक प्रकृति और सीमित आवासीय इलाकों की वजह से इनका यहां टिकना कठिन होता है, लेकिन गहनता से जांच कि जाए तो सायद बंगलादेशी यहां भी मिल जाए। 

इधर कोरबा पुलिस प्रशासन का कहना है कि जिले में सतत निगरानी रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर है। जिला पुलिस ने बताया कि समय-समय पर वेरिफिकेशन ड्राइव और दस्तावेज जांच अभियान चलाए जाते हैं। यदि कोई संदिग्ध पाया जाता है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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