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मंडल अध्यक्ष चुनाव मे फ़सा पेंच, भाजपा संगठन के लिए बढ़ी चुनौती, आखिर कौन बनेगा बचे मंडलो मे अध्यक्ष।

 मंडल अध्यक्ष चुनाव मे फ़सा पेंच, भाजपा संगठन के लिए बढ़ी चुनौती, आखिर कौन बनेगा बचे मंडलो मे अध्यक्ष। 



छत्तीसगढ़ मे भाजपा संगठन का चुनाव चल रहा जिसमे बूथ अध्यक्ष व मंडल अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न कर लिया गया, कोरबा मे योगेश मिश्रा, कोसाबाड़ी राजेश राठौर, बालको डिलेंद्र यादव, सर्वमंगला मनीष मिश्रा, कटघोरा अभिषेक गर्ग, दीपका राजू प्रजापति, हरदीबाजार कृष्णा पटेल, भिलाई बाजार दिनेश राठौर, बांकी मोंगरा उदय शर्मा, उरगा किशन साव, बरपाली ओम साहू, फरसवानी नरेंद्र बिंझवार, करतला रामकुमार गभेल, कुदमुरा बृजलाल राठिया, गढ़उपरोड़ा हरिशंकर यादव, लाफा पोड़ी बिपिन कौशिक, चैतमा बृजेश यादव, पासन प्रताप मरावी, चोटिया से ऋषि प्रजापति मंडल अध्यक्ष बनाये गए वही संगठन ने सिरमिना मे रवि मरकाम का मंडल अध्यक्ष नियुक्ति निरस्त कर दिए गए। बाकी बचे दर्री, जवाली, पाली, पोड़ीउपरोड़ा मे मंडल अध्यक्षों के चुनाव कुछ कारण वश नहीं किया गया संगठन जल्द ही रिक्त मंडलो मे नियुक्ति कर देगी। 

क्या संगठन कार्यकर्ताओ मे सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रहा, आखिर कहा फसा है पेंच। 

पाली तानाखार विधानसभा मे 7 जनपद क्षेत्र हैं जहाँ दो जनपद कों छोड़ बाकि 5 सामान्य सीट पर कब्जा है, भाजपा खेमे मे संगठन कोई जाती वर्ग विषेस कों महत्व नहीं देता बल्कि जुझारु कर्मठ कार्यकर्ता का चुनाव कर पार्टी के लिए कार्य करें इस पर अधिक ध्यान देता है, कोरबा जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जहाँ ब्लॉक अध्यक्ष भी आदिवासी, विधायक सीट आदिवासी, जिला अध्यक्ष आदिवासी जनरली सभी आदिवासी सीट से लड़ाई भी लड़ते है और तों और प्रत्येक गांव का सरपंच भी आदिवासी है वही ज़ब हर पहलु से देखा जाये तों आदिवासी सीटों का वर्चस्व देखा जा सकता है अब बात रहि ओबीसी सीटों की जहाँ obc वर्ग की संख्या भी लमसम ठीक ही है लेकिन जनपद क्षेत्र मे 5 सामान्य सीटों पर आदिवासीयों के साथ उनके बीच कर्मठता से कार्य की गतिविधि व पार्टी के लिए काम की गतिविधि बढ़ी इसे बड़ी बात क्या होगी, कहने का आशय obc वर्ग मे जुझारू कार्यकर्ता सेवा देते आ रहे वही पार्टी खेमे मे संगठित होकर obc वर्ग के जुझारू कार्यकर्ता आदिवासी से समंजसय स्थापित कर कार्य करते आ रहे हैं।


भारतीय जनता पार्टी के संगठन में सामंजस्य की कमी के कारण पोड़ी उपरोड़ा मंडल अध्यक्ष के चुनाव में आ रही दिक्क़तो से संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक गुटबाजी का संकेत हो सकता है, स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच तालमेल की कमी के टकराव, कभी-कभी शीर्ष नेतृत्व के फैसलों में देरी से स्थानीय स्तर पर असमंजस की स्थिति बन जाती है। सभी पक्षों को संतुष्ट करने वाले व्यक्ति का चयन करना कठिन हो जाता है। कुछ क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों और राजनीति का प्रभाव संगठनात्मक निर्णयों पर भी हावी हो सकता है। इस स्थिति का समाधान संगठन के भीतर बेहतर संवाद, पारदर्शिता और त्वरित निर्णय लेने से किया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व को निष्पक्ष रूप से काम करना होगा और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की राय को भी महत्व देना होगा।


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