कटघोरा ह्रदय स्थल का हाल बूरा, जनता एक सुंदर शहर कि राह ताक रहि। वार्ड नंबर 6 मे सड़को पर निकली राड दुर्घटना कों बुलावा।
रिपोर्ट :- नानक राजपुत
2014 से नगर पालिका बनने के बाद से ही नगर वाशियों मे एक बार फिर उम्मीद कि किरण जाग उठी थी कि हमारा यह शहर अब विकास से सजेगा लेकिन कुछ वर्ष बीतने के बाद जनताओं मे निराशा ही हाथ लगी क्युकी कई वार्डो मे पानी व सड़को कि समस्या बरकरार है सीधा उदाहरण है वार्ड क्रमांक 12 कि जहाँ गदेलीपारा मोहल्ला जो आज भी विकास से कोसो दूर है आज भी पगडंडी राहें हैं जिनमे जनता नगरपालिका के अधिकारीयों कों कोसते हुए चल रहि है और तों और शहर के ह्रदय स्थल बस स्टैंड मे ही समस्याएं देख लो जहाँ वार्ड नंबर 6 मे सडके उखड़ी हुई है उखड़कर राड बाहर निकल गए, हालाकि मरहम बतौर मिट्टी डालकर खाना पूर्ति जरूर कि जाती है लेकिन यह कब तक आखिर जनता का स्थाई समाधान कटघोरा सीएमओं साहब निकाल क्यों नहीं पा रहे यें जनताओं के मन मे सवाल बार बार उठ रहि हैं वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष रतन मित्तल ने वर्षों तक अध्यक्ष के पद पर सिहासन पर बैठे हुए थे पुनः इस पंच वर्षीय उन्होंने अध्यक्ष का कमांड संभाला यु कहे तों अध्यक्ष पद के सिहासन का वर्षों का लम्बा अनुभव कहा जा सकता है, लेकिन फिर भी नगरपालिका अध्यक्ष कि निगाहे अनदेखी क्या अध्यक्ष महोदय कों अमजनों कि सुविधा व समस्याओं कि चिंता ही नहीं। नगरपालीका अध्यक्ष नगर के कर्णधार है वह नगरपालिका का प्रमुख होता है इन्हे मुख्य कार्यों कि जिम्मेदारी होती है जैसे सार्वजनिक मार्गों, सड़कों, गलियों में लाइट वगरह का रखरखाव करना, सार्वजनिक उद्यानों में मार्ग प्रकाश की व्यवस्था करना वही नगर मे स्वास्थ्य और शिक्षा जल कि पूर्ति हर एक कार्यों पर नजरें बटोर कर नागरिको के हितैषी के रूप मे कार्य करना होता है नगरवासियो का कहना है कि अध्यक्ष का इन तमाम कार्यों मे कोई गतिविधि नहीं दिखती।
कटघोरा नगर के सीएमओं ज्ञान कुंज कुलमित्र के सुस्त कार्यप्रणाली
बात करे कटघोरा नगर के सीएमओं ज्ञान कुंज कुलमित्र के सुस्त कार्यप्रणाली का जहाँ हमेसा से ही अपनी कार्य शैली कों लेकर विवादों से घिरे रहे ना इनसे ट्रैफ़िक कि समस्या दूर हो सकी ना ही शहरी क्षेत्रो मे अतिक्रमण दूर हुई जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि व जनताओं ने शहर मे सुव्यवस्थित यातायात कि मांग दर्जनों बार कि है लेकिन मांगो के अनुरूप कार्य पूरी नहीं हो सकी, सीएमओं के कार्य शैली का अंजाम आज भी बरकरार है जहाँ बस स्टैंड मे सडके खराब से हर छोटी बड़ी वाहनो व लोगों को आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है दोपहिया व चारपहिया का चलना भी मुश्किल है। कटघोरा के सीएमओं साहब के अनदेखी के चलते नगरवासी गड्ढे भरे मार्ग पर चलने को मजबूर हो रहे हैं, स्थानीय नगरवासियो का कहना है कि सड़क पर लगी कांक्रीट वर्षो से उखड़ी हुई है लोहे के राड निकल चुके हैं जिसकी वजह से कई जगह खतरनाक गढ्ढे बन गए हैं। इन गढ्ढों की वजह से दोपहिया वाहनों का चलना भी मुश्किल हो गया है। कई बार वाहनों के पहियें भी डेमेज हो चुके हैं।
कटघोरा नगर पंचायत कों पुनः 15 अगस्त 2014 कों नगरपालिका के रूप मे दर्जा मिला वही आबादी कम होने के कारण 1994 में नगर पालिका से नगर पंचायत बना दिया गया था। इसके बाद से लगातार नगर पालिका बनाने की मांग की जा रही थी। 20 हजार से अधिक आबादी होने पर पुन: कटघोरा कों 2014 मे नगर पालिका के रूप मे अस्तित्व मे लाया गया, लेकिन आज भी नगरपालिका की समस्याएं जस की तस बनी हुई है।
बस स्टैंड पर उबड़-खाबड़ सड़क, सड़क में बने गढ्ढे और गढ्ढों में भरा धूल चारो तरफ फैली गंदगी से नगरपालिका का हाल बत्तर है, डबल इंजन कि सरकार आखिर कटघोरा पर विकास कि गंगा कब बहाएगी, जानता उस दिन का बेसब्री से इंतजार मे हैं।


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