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*संत रामपाल जी महाराज के सत्संग से प्रेरित होकर आध्यात्मिक जीवन की ओर कदम*

कुनकुरी , जशपुर: संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में कुनकुरी के अग्रसेन भवन में एक दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु गण बढ़-चढ़कर भाग लिया। गांव-गांव से अनुयियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को खास बनाया।



बड़े पर्दे पर संत रामपाल जी महाराज के प्रवचनों का प्रसारण किया गया। प्रवचन में संत ने ऋग्वेद का उल्लेख करते हुए बताया कि परमात्मा सर्व सृष्टि के रचनाहार हैं, जो अपनी रचना के विभिन्न हिस्सों में प्रकट होते हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा के सत्यलोक से बिछड़ने के बाद नीचे के ब्रह्म और परब्रह्म के लोक उत्पन्न होते हैं।पूर्ण परमात्मा, जो ब्रह्मा (काल) और


परब्रह्म (अक्षर पुरुष) से भी ऊपर है, सर्वत्र व्याप्त है। उनकी प्रभुता सभी पर है और कबीर परमेश्वर ही कुल का मालिक हैं।संत ने काल के लोक का वर्णन करते हुए कहा कि यहां कब क्या घटित होगा, यह कोई नहीं जानता। कई बार पूरे परिवार एक साथ काल के द्वारा दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं, और समय से पहले अकाल मृत्यु का सामना करते हैं।लोग अपने कर्मों के कारण इलाज़ योग्य बीमारियों से जूझते हैं और किसी अन्य व्यक्ति या पुस्तक के अनुसार साधना करके भी दुखी रहते हैं।संत ने पवित्र धर्मग्रंथों के संदर्भ में बताया कि:बाइबिल (अय्यूब 36:5) में लिखा है कि परमेश्वर कबीर हैं।कुरान शरीफ में भी कबीर का उल्लेख है (सूरत फुर्कानी) 25. आयात नं. 52.से 59. तक अरबी भाषा में कबीरा कबीरन व खबीरा खबीरन नाम है।साधना का महत्व संत ने स्पष्ट किया कि शास्त्र अनुकूल भक्ति (साधना) करने से ही पाप कर्म कटते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


यह सत्संग अनुयायियों के लिए ज्ञान और जागरूकता का स्रोत रहा, जो साधना के माध्यम से सच्चे मार्ग की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

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