रिपोर्ट :- नानक राजपुत
पोड़ी उपरोड़ा मे 35 वर्षो से शरदीय नवरात्र मे माँ कि पूजा अर्चना कि जा रहि है कल याने तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा विराजमान हुई, माँ दुर्गा की उपासना व भक्ति में सभी भक्त लीन हैं चारो तरफ माँ कि जयकारा लग रहि है माता रानी के दरबार मे उपासक माथा टेक अपनी मनोकामनायें मांग रहे हैं, पोड़ी उपरोड़ा के दो देव स्थलों मे माँ दुर्गा कि पूजा कि जाती है पोड़ी बस्ती मे माँ मरखी माता व बस स्टैंड मे माँ दुर्गा शरदीय नवरात्र मे विराजमान हुई हैं, वही पोड़ी उपरोड़ा दुर्गा उत्सव समिति मे लगभग विगत 13-14 वर्षो से पूजा करवा रहे आचार्य श्री रविंद्र मिश्रा जो कि प्रयागराज के निवासी है जिनके मुखारबिन से सुंदर आरती व पूजा अर्चना कि जाती है महराज श्री मिश्रा ने कहा कि तीसरे दिन मे माँ चंद्र घंटा कि पूजा कि जाती है मान्यता है कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघण्टा मां का तेजस्वी और शक्तिशाली रूप होता है। मां के सिर पर घंटे के आकार का चांद होने के कारण उन्हें चंद्रघण्टा कहा जाता है। मां चंद्रघण्टा, मां दुर्गा का ही एक रूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। मां का यह रूप ममता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनके सिर पर अर्धचंद्र के आकार का घंटा उनकी पहचान है, इसलिए उन्हें चंद्रघण्टा नाम दिया गया है।
वही आज चौथे स्वरूप कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। सनातन धर्म में नवरात्रि पर शक्ति की साधना का बहुत अधिक महत्व होता है। आज के दिन मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, दुर्गा मां के इस रूप की आराधना करने से देवी आशीष प्रदान करती हैं और सभी दुखों का नाश होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कूष्माण्डा की मुस्कान की एक झलक ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया। इन्हें अष्टभुजा देवी के रूप में भी जाना जाता है।
35 वर्षो से चली आ रहि पोड़ी उपरोड़ा दुर्गा उत्सव समिति द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ पूजा अर्चना कि जाती है जिसमे पोड़ी उपरोड़ा समेत आसपास के भक्तो कि भीड़ उमड़ी रहती है।

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