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केंदई, ऐतमा, पसान रेंज हाथी प्रभावित किसानो का विक्राल जन आंदोलन के तैयारी, वन विभाग व प्रशासन कि कार्यवाही से नाखुश ग्रामीणों ने लिया निर्णय, लगातार हो रहि किसानो कि बैठक, जल्द ही होगा जनआनदोलन

 रिपोर्ट :- नानक राजपुत 


कोरबा जिले मे इन दिनों हाथी का आतंक हावी है हाथी रहवासी इलाके मे आने लगे हैं, जिससे किसानो के फसल, घर तो बर्बाद कर रहि रहे हैं वही इंसानों को भी मौत के घाट उतार रहे हैं लेकिन विभाग कि छति पूर्ति राशि महज खाना पूर्ति साबित हो रहि नुकसान के अनुरूप किसानो को मुवावजा नहीं दिया जा रहा वही बात करें किसानो कि फसलों कि तो ऐसे कितने किसान हैं जो विभाग के कार्यवाही से आक्रोश हैं,


लेमरू देवपहरी एलीफेंट रिजर्व एरिया अलार्ट, बावजूद रहवासी इलाके मे घूम रहे हाथी। 

किसानो ने बताया कि लेमरू देवपहरी विषेस तौर पे हाथियों के लिए रिजर्व एरिया हैं जहाँ हाथियों के रखा जाना है लेकिन वर्तमान मे हाथी रहवासी इलाके मे घूम रहे हैं जिससे ग्रामीण दहशत मे हैं किसानो का कहना है कि विभाग कि नाकामी सुस्त रवैया है कि हाथीयों को खदेड़ पाने मे असमर्थ हो रहे हैं जबकि विभाग चाहे तो रिजर्व एरिया मे हाथियों को सरक्षित कर बडी मात्रा मे फेंसिंग कर हाथियों को रहवासी इलाके मे आने से रोका जा सकता है, बता दे कि प्रशासन हाथी निगरानी हाथी बचाओ हाथी से छति पूर्ति के लिए करोड़ो कि राशि खर्च करती है वही अगर प्रशासन रिजर्व एरिया मे मोटी राशि खर्चा कर एरिया को फेंसिंग से बंद कर दिया जाये तो सायद वृहद हादसा को कुछ हद तक रोका जा सकता है।



क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी आक्रोश हैं किसान, कहा नहीं मिल रहा साथ 

आज हाथी किसानो के फसलों को नुकशान पंहुचा रहें है, और इसका संसाधन उनको उपलब्ध कौन कराएगा, या सहयोग कौन करेगा उस पर विचार बनाने के लिए बैठक रखी गई, वही जनप्रतिनिधि जनपद, जिला सदस्य, विधायक, सांसद पर भी आक्रोसीत हुए कहा कि इसी दिन के लिए क्या जानता ने इन्हे चुना है जो किसानो का साथ नहीं दे सकते, वही कहा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि प्रशासन को कड़ा बोली बोलले क्योंकि इस पाली तानाखार मे यही जनप्रतिनिधि कुछ रास्ता निकाल सकते है। 

हाथी के दस्तक देते ही बंद कर दी जाती है बिजली, कई जगह पर सोलर लाइट दी जाने कि मांग

हाथी प्रभावित ग्राम पोंडी ब्लॉक के लगभग 70%ग्राम होंगे जो हाथियों से प्रभावित, जहाँ न तो सोलर लाइट दिया गया न ही और कोई सुरक्षा हेतु सावधानी वाला सामग्री दिया गया जबकि अगर हाथियों के संरक्षण हेतु वन्य जीव मे शामिल हैँ तो इस पर बजट भी करोड़ो कि आती होंगी किसानो ने कहा कि या तो उस बजट को वन विभाग हजम कर देता होगा या ऊपर के नेता हजम कर देते होंगे।



किसान किसे देवें दोषी, मजबूरन किसान कर रहे आत्महत्या 

 इस भयानक परेशानी का दोस किसान किसे दे, जो हाथियों के आतंक से बहुत परेशान है ना विभाग का सहयोग मिल रहा न प्रसासन का मजबूरी किसान आत्महत्या करने को भी बेबस होते जा रहे हैं, इसलिए लिए सभी किसानो ने निर्णय लिया एक आवाज बनकर विशाल आंदोलन कि जानी चाहिए, भले ही जेल जाना क्यों न पड़े लेकिन अपनी परेशानी अपनी तकलीफे बताने के लिए प्रसासन कि आँखे खोलनी पड़ेगी।

आंदोनल मे कोई राजनितिक दल शामिल नहीं, किसानो का है आंदोनल

किसानो ने बताया कि इस आंदोलन मे किसी भी राजनितिक दल का समावेश नहीं है यह सिर्फ और सिर्फ किसानो कि ग्रामीणों कि लड़ाई है, इस पर किसी भी दलगत राजनीती कार्यकर्ता शामिल नहीं हैं, इसका विषेस ध्यान रखा गया है, इस बैठक मे सामान्य लोगो की तरह आम जनता के रूप मे बैठकर तय किये गए और हाथियों की इस समस्या को बड़ा आंदोलन का रूप देने के लिए निश्चित तिथि तय कि जा रहि। 

हाथी प्रभावित ग्राम के नाम जिनको इस आगामी आंदोलन मे शामिल होने कि संभावना है सालिहाभाटा, तुर्रा पारा, ठाड़पखना, बाला, सिकता पारा, मनोहरा, दमोकुंडा, झालीयमुड़ा, मानिकपुर, भूलेझरिया, डांघिआमा, गुरसिया, बांधापारा, छाता पखना, सरभोका, रिंगनिया, बंजारी, गांधीनगर, कोद्ववारी, मड़ई, बूका, पचरा, मड़वाढोढा, कारीछापर, माँतीन, आमाटीकरा, देमट्टी, हड़मोड, लमना, परला, कापा नवापारा, ढोढबहार, चोटिया, बनिया, गाडागोड़ा, सेमराहवा, हरदेवा, बर्रा, बेतलो, साशिन, तनेरा, सुखरिताल, सरमा, जलके, पंनगवा, कोरबी, बीजाडांड, झीनपुरी, पाली, सेंन्हा, सितिपखना, फूलसर, लाद, रोदे, पोंडी खुर्द, सलाईगोट, लालपुर, घूँचापुर, जजगी, सिमगा, घोसरा और भी अन्य ग्राम हैं जो उक्त आंदोलन मे शामिल हो सकते हैं। 

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